हिमाचल प्रदेश सरकार की ‘राजीव गांधी प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान’ योजना किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है। इस योजना के तहत प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा हाल ही में पेश बजट में प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों के दामों में और वृद्धि की गई है, जिससे किसानों को और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
MSP में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
सरकार पहले प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं को 60 रुपये, मक्की को 40 रुपये, कच्ची हल्दी को 90 रुपये और पांगी घाटी के जौ को 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद रही थी। अब इन कीमतों में बढ़ोतरी करते हुए गेहूं का MSP 80 रुपये, मक्की का 60 रुपये, कच्ची हल्दी का 150 रुपये और जौ का 80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। इसके अलावा अदरक को पहली बार MSP के दायरे में लाते हुए 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है, जो किसानों के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
दुग्ध उत्पादकों को भी लाभ
सरकार ने केवल फसलों तक ही सीमित नहीं रहते हुए पशुपालकों को भी राहत दी है। गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसानों की आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं।
किसान की सफलता की कहानी
हमीरपुर जिले के निकटवर्ती क्षेत्र के एक प्रगतिशील किसान संजीव कुमार इस योजना के लाभार्थियों में शामिल हैं। संजीव कुमार ने बताया कि वे पहले पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन उसमें अधिक लाभ नहीं हो रहा था। जैसे ही सरकार ने प्राकृतिक खेती के लिए बेहतर दाम तय किए, उन्होंने इस पद्धति को अपनाने का निर्णय लिया। आज उनके खेतों में प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं की फसल लहलहा रही है और उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है।
लागत में कमी, मुनाफा अधिक
संजीव कुमार के अनुसार प्राकृतिक खेती की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम लागत है। इस पद्धति में किसान घर पर ही जीवामृत और बीजामृत तैयार करते हैं और रासायनिक खाद व कीटनाशकों के बजाय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हैं। इससे न केवल खेती का खर्च घटता है, बल्कि फसलें भी अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक होती हैं।
स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए लाभकारी
प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी साबित हो रही है। रासायनिक मुक्त खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जल स्रोत भी प्रदूषण से बचते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
इस योजना का प्रभाव केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र को मजबूत कर रही है।बेहतर दाम मिलने से किसानों की क्रय शक्ति बढ़ रही है, जिससे स्थानीय बाजारों में भी गतिविधियां तेज हो रही हैं।