जिप सदस्यों ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर जताया विरोध

rakesh nandan

05/06/2026

मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर जिला परिषद सदस्यों की नाराजगी, लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान की मांग

शिमला। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों के जिला परिषद सदस्यों ने मुख्यमंत्री द्वारा जिला परिषद और बीडीसी प्रतिनिधियों को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शिमला ग्रामीण से जिला परिषद सदस्य शिवानी ठाकुर, कांगड़ा जिले के खोली वार्ड से जिला परिषद सदस्य विजय कुमार (वीजू), बिलासपुर से जिला परिषद सदस्य अशोक शर्मा तथा कुल्लू से जिला परिषद सदस्य अनिल राणा ने संयुक्त बयान जारी कर इस टिप्पणी को लोकतांत्रिक संस्थाओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान के विपरीत बताया।

संयुक्त बयान में उन्होंने कहा कि जिला परिषद, पंचायत समिति (बीडीसी), ग्राम पंचायत और अन्य स्थानीय निकाय लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारभूत इकाइयां हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं का संचालन, स्थानीय समस्याओं का समाधान और जनता की अपेक्षाओं को प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य किया जाता है। ऐसे में इन संस्थाओं के महत्व को कम करके आंकना उचित नहीं माना जा सकता।

जिला परिषद सदस्यों ने कहा कि प्रदेश भर में जिला परिषद और बीडीसी के प्रतिनिधि जनता के प्रत्यक्ष मतदान से चुने जाते हैं। प्रत्येक प्रतिनिधि अपने क्षेत्र के हजारों मतदाताओं का विश्वास और समर्थन प्राप्त करके निर्वाचित होता है। इसलिए किसी भी प्रकार की टिप्पणी जो इन प्रतिनिधियों की भूमिका या महत्व को कमतर दर्शाती हो, उसे जनता की भावनाओं से भी जोड़कर देखा जाता है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक निर्वाचित प्रतिनिधि का अपना महत्व होता है। चाहे वह ग्राम पंचायत स्तर का प्रतिनिधि हो, जिला परिषद सदस्य हो या फिर विधानसभा अथवा संसद का सदस्य, सभी जनप्रतिनिधि जनता की इच्छा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का परिणाम होते हैं। इसलिए लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जिम्मेदारी है।

संयुक्त बयान में कहा गया कि स्थानीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाएं ग्रामीण विकास की रीढ़ मानी जाती हैं। गांवों की आधारभूत समस्याओं, विकास परियोजनाओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं और जनहित से जुड़े मुद्दों को इन संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है। ऐसे में इनकी भूमिका को कम महत्व देना स्थानीय शासन व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है।

जिला परिषद सदस्यों ने कहा कि हाल ही में हुए पंचायतीराज और स्थानीय निकाय चुनावों में जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर विभिन्न प्रतिनिधियों का चुनाव किया है। चुनाव परिणाम लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और सभी राजनीतिक दलों तथा नेताओं को जनता के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जनादेश का सम्मान लोकतंत्र की मूल भावना है। यदि जनता किसी प्रतिनिधि को चुनकर भेजती है, तो उसकी भूमिका और जिम्मेदारियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। जनप्रतिनिधियों का सम्मान वास्तव में जनता के मत और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सम्मान से जुड़ा हुआ विषय है।

संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि जिला परिषद और बीडीसी सदस्य ग्रामीण क्षेत्रों में जनता और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। वे लोगों की समस्याओं को संबंधित विभागों और सरकार तक पहुंचाने का काम करते हैं। इसलिए इन प्रतिनिधियों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

शिवानी ठाकुर, विजय कुमार (वीजू), अशोक शर्मा और अनिल राणा ने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और सभी राजनीतिक दलों को इस सिद्धांत का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने और जनप्रतिनिधियों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों मतदाताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर अपने प्रतिनिधियों का चुनाव किया है। ऐसे में जनमत और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

संयुक्त बयान में जिला परिषद सदस्यों ने लोकतंत्र की मजबूती, जनमत के सम्मान और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता दोहराते हुए कहा कि जनता की आवाज और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।