विश्व पर्यावरण दिवस पर थुनाग परिसर में जागरूकता कार्यक्रम, वृक्षारोपण और प्रतियोगिताओं का आयोजन
मंडी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के उप परिसर औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, थुनाग स्थित गोहर-गुडाहरी में विभिन्न पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और स्थानीय समुदाय में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में वृक्षारोपण अभियान, रचनात्मक प्रतियोगिताएं तथा जागरूकता गतिविधियां मुख्य आकर्षण रहीं। कॉलेज प्रशासन के अनुसार कुल 120 विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. पी.एल. शर्मा रहे। उन्होंने अपने संबोधन में वर्तमान समय में बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इसके प्रभाव पर्यावरण, कृषि, जल संसाधनों तथा मानव जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने युवाओं से प्रकृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण तथा सतत विकास की अवधारणा को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
कार्यक्रम के दौरान परिसर में व्यापक वृक्षारोपण अभियान भी चलाया गया। विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने मिलकर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए। यह अभियान हरित परिसर विकसित करने और पर्यावरण संतुलन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया।
वृक्षारोपण के दौरान प्रतिभागियों को पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें विकसित होने तक संरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित रचनात्मक प्रतियोगिताओं ने भी विद्यार्थियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम के अंतर्गत बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट, डॉक्यूमेंट्री निर्माण तथा फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के विषय पर अपनी रचनात्मक सोच और नवाचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अनुपयोगी वस्तुओं को उपयोगी सामग्री में बदलकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। वहीं फोटोग्राफी प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने प्रकृति की सुंदरता, जैव विविधता और पर्यावरणीय चुनौतियों को अपने कैमरे में कैद कर प्रस्तुत किया।
डॉक्यूमेंट्री निर्माण प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर लघु फिल्में तैयार कीं। इन प्रस्तुतियों ने पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कॉलेज प्रशासन ने बताया कि इन प्रतियोगिताओं का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना विकसित करना और उन्हें नवाचार के लिए प्रेरित करना था। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने यह साबित किया कि युवा पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर और जागरूक है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। उन्होंने वृक्षारोपण, स्वच्छता, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कॉलेज प्रशासन ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने का संकल्प दोहराया।