हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में CBSE बोर्ड लागू करने के निर्णय को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की इस पहल को शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। जिला मंडी में इस योजना के तहत पहले चरण में 23 सरकारी स्कूलों को CBSE पाठ्यक्रम के अधीन लाया गया है, जहां वर्तमान शैक्षणिक सत्र से प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
12 हजार से अधिक छात्रों ने लिया दाखिला
अब तक इन स्कूलों में 12,083 से अधिक छात्रों ने प्रवेश ले लिया है, जो इस योजना की लोकप्रियता को दर्शाता है। जोगिंदरनगर और करसोग जैसे क्षेत्रों में दाखिले का आंकड़ा एक हजार के पार पहुंच चुका है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
किन-किन स्कूलों में लागू हुआ CBSE
मंडी जिले के भंगरोटू, मढ़ी, पनारसा, जोगिंदरनगर, करसोग, गोहर, सरकाघाट, सुंदरनगर, जंजैहली, रिवालसर, पधर, कोटली, बालीचौकी, चौंतड़ा सहित कुल 23 सरकारी स्कूलों में CBSE पैटर्न शुरू किया गया है। इन स्कूलों में बाल वाटिका से लेकर जमा दो (12वीं) तक प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
सभी कक्षाओं में बढ़ा नामांकन
विभिन्न कक्षाओं में भी दाखिले का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
- नौवीं में 1295
- दसवीं में 1165
- जमा एक में 1862
- जमा दो में 1873 छात्र
इसके अलावा प्राथमिक कक्षाओं और बाल वाटिका में भी सैकड़ों बच्चों ने प्रवेश लिया है, जिससे स्पष्ट है कि अभिभावक अब सरकारी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं।
अभिभावकों में दिखा उत्साह
इस निर्णय से अभिभावकों को निजी स्कूलों की भारी फीस से राहत मिली है। मंडी की रहने वाली आसमा फातुन ने बताया कि पहले उनका बच्चा निजी स्कूल में पढ़ता था, जहां फीस बहुत अधिक थी। अब सरकारी स्कूल में CBSE शिक्षा मिलने से उन्हें राहत मिली है। वहीं नगीना कुमारी ने भी कहा कि निजी स्कूल की फीस के कारण आर्थिक परेशानी होती थी, लेकिन अब सरकारी स्कूल में बेहतर शिक्षा सुलभ हो गई है।
छात्रों ने भी जताया आभार
बीजे स्कूल मंडी में दाखिला लेने वाली छात्राओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि अब वे निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में CBSE पाठ्यक्रम के तहत पढ़ाई कर सकेंगी।
अधिकारियों का क्या कहना है
बीजे स्कूल मंडी के प्रधानाचार्य अशोक ठाकुर ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के आवश्यक दस्तावेजों के साथ समय रहते दाखिला करवाएं। वहीं उप निदेशक उच्च शिक्षा यशवीर धीमान ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया 30 अप्रैल तक विलंब शुल्क के साथ जारी रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कक्षा में 40 से अधिक छात्र होते हैं, तो अलग सेक्शन बनाया जाएगा और किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं रखा जाएगा।
शिक्षा में समानता की दिशा में कदम
सरकारी स्कूलों में CBSE लागू करने का यह निर्णय शिक्षा में समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जो पहले केवल निजी स्कूलों तक सीमित था।