Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) की Himachal Pradesh University इकाई द्वारा आज विश्वविद्यालय परिसर में प्रदेश सरकार और प्रशासन की कथित छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ एक विशाल हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। यह अभियान मुख्य रूप से हाल ही में की गई फीस वृद्धि और पीजीटी (Post Graduate Teacher) पदों पर अस्थाई भर्ती के विरोध में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया और अपनी नाराजगी जाहिर की।
फीस वृद्धि को लेकर विरोध तेज
विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस में 10 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। परिषद का कहना है कि इस फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिससे उनकी उच्च शिक्षा प्रभावित हो सकती है। छात्रों का मानना है कि शिक्षा एक बुनियादी अधिकार है और इसे महंगा बनाना सामाजिक असमानता को बढ़ावा देगा।

PGT भर्ती नीति पर सवाल
ABVP ने पीजीटी शिक्षकों की अस्थाई भर्ती (कॉन्ट्रैक्ट/गेस्ट पॉलिसी) को भी कठोर शब्दों में विरोध किया। परिषद का कहना है कि अस्थाई नियुक्तियां न केवल युवाओं के रोजगार के साथ अन्याय हैं, बल्कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। उन्होंने मांग की कि इन पदों पर नियमित भर्ती की जाए ताकि शिक्षण व्यवस्था मजबूत हो सके और योग्य युवाओं को स्थायी रोजगार मिल सके।
छात्रों का मिला व्यापक समर्थन
आज आयोजित हस्ताक्षर अभियान के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया। छात्रों ने इस अभियान के माध्यम से प्रशासन के फैसलों के खिलाफ अपनी असहमति दर्ज करवाई और परिषद के साथ एकजुटता दिखाई। यह समर्थन दर्शाता है कि विश्वविद्यालय के भीतर इन मुद्दों को लेकर व्यापक असंतोष है।

ABVP का प्रशासन पर आरोप
इकाई मंत्री सुशील शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार लगातार छात्र हितों की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “फीस वृद्धि का निर्णय तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और पीजीटी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए नियमित नियुक्तियां की जानी चाहिए।”
मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी आवाज
ABVP ने स्पष्ट किया कि इस हस्ताक्षर अभियान का पूरा रिकॉर्ड प्रदेश के मुख्यमंत्री तक भेजा जाएगा, ताकि छात्रों की आवाज सरकार तक पहुंच सके। परिषद का कहना है कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों के लिए एक लोकतांत्रिक पहल है।

आंदोलन की चेतावनी
परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और सरकार जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेते, तो संगठन पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि छात्र हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
शिक्षा और रोजगार पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि फीस वृद्धि और अस्थाई भर्ती जैसे फैसले शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए इन मुद्दों पर संतुलित और संवेदनशील निर्णय लेना आवश्यक है, ताकि छात्रों और शिक्षकों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।
