मंडी में हिमाचल दिवस, विक्रमादित्य सिंह ने फहराया तिरंगा

rakesh nandan

15/04/2026

हिमाचल दिवस के अवसर पर जिला मंडी में ऐतिहासिक सेरी मंच पर भव्य जिला स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए राष्ट्रीय ध्वज फहराया और भव्य मार्चपास्ट की सलामी ली।

कार्यक्रम की शुरुआत इंदिरा मार्केट परिसर स्थित शहीद स्मारक और सेरी क्षेत्र में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके पश्चात पुलिस, गृह रक्षक वाहिनी, एनसीसी, एनएसएस तथा स्काउट एंड गाइड्स की टुकड़ियों ने अनुशासन और देशभक्ति का शानदार प्रदर्शन करते हुए मार्चपास्ट प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने दर्शकों का मन मोह लिया और समारोह को उत्सव में बदल दिया।

समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने हिमाचल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 15 अप्रैल 1948 को 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों के विलय से हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रजामंडल आंदोलन के नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और हिमाचल के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।

उन्होंने प्रदेश के विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हिमाचल का कोई भी क्षेत्र सड़क सुविधा से वंचित न रहे। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हर गांव और बस्ती तक सड़क पहुंचाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

उन्होंने जानकारी दी कि शिल्हबुधाणी-भुभुजोत-कुल्लू सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने के प्रयास जारी हैं, जिसे रक्षा मंत्रालय ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इसे दो लेन सड़क में विकसित करने के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। भुभु-जोत टनल के निर्माण से कांगड़ा और कुल्लू के बीच की दूरी लगभग 55 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बड़ा लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 1538 किलोमीटर सड़कों के लिए 294 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिन पर लगभग 2244 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा अगले चरण में 800 किलोमीटर सड़कों के निर्माण के लिए 1200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार पुरानी सड़कों के रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दे रही है और इसके लिए लगभग 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आगामी वर्ष में 500 किलोमीटर नई सड़कें, 1255 किलोमीटर क्रॉस ड्रेनेज कार्य, 950 किलोमीटर टारिंग और 47 नए पुलों का निर्माण किया जाएगा।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सरकार “गांव के द्वार” कार्यक्रम के तहत दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को घर-घर सेवाएं प्रदान कर रही है, जबकि विशेष राजस्व अदालतों के माध्यम से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा किया जा रहा है।

प्रदेश की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान समाप्त होने से चुनौतियां जरूर बढ़ी हैं, लेकिन हिमाचल के लोगों की इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयासों से इन चुनौतियों का सामना किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों में 49,500 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है और अपने चुनावी वादों को पूरा किया है। 1.36 लाख कर्मचारियों के लिए ओपीएस बहाल की गई है, जबकि महिलाओं के लिए इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना लागू की गई है।

युवाओं के लिए 680 करोड़ रुपये की राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना शुरू की गई है, जिसके तहत ई-टैक्सी खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी कई प्रावधान किए गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है, जो शिमला, टांडा और नेरचौक जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध है। शिक्षा क्षेत्र में सुधारों के चलते हिमाचल ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने का लक्ष्य हासिल किया है और राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण में देश में पांचवां स्थान प्राप्त किया है।

उन्होंने नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए “चिट्टा मुक्त हिमाचल” अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान नगर निगम मंडी द्वारा स्वच्छता जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया गया और स्वच्छता कर्मियों, परेड में भाग लेने वाली टुकड़ियों तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने इस समारोह की गरिमा को और बढ़ाया। हिमाचल दिवस का यह आयोजन न केवल प्रदेश की गौरवशाली विरासत का प्रतीक बना, बल्कि विकास, एकता और जनभागीदारी का भी संदेश दे गया।