हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल रिज मैदान पर 15 अप्रैल को जिला स्तरीय हिमाचल दिवस समारोह हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और राष्ट्रीय महत्व के इस दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अप्रैल 1948 का दिन हिमाचल प्रदेश के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी दिन 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों के विलय से प्रदेश का गठन हुआ था। उन्होंने उन सभी महान विभूतियों, प्रजामंडल आंदोलन के नायकों और हिमाचलवासियों को नमन किया, जिनके प्रयासों से प्रदेश आज देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।
उन्होंने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार को भारी कर्ज विरासत में मिला, जिसमें लगभग 76 हजार करोड़ रुपये का ऋण और कर्मचारियों की देनदारियों के रूप में करीब 10 हजार करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके बावजूद सरकार ने पिछले तीन वर्षों में 25 हजार करोड़ रुपये के कर्ज की अदायगी की है और लगभग 49,500 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान समाप्त किए जाने से प्रदेश को प्रतिवर्ष 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा, जिससे आर्थिक चुनौतियां और बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों से निपटने के लिए सरकार नए संसाधनों के सृजन और वित्तीय अनुशासन पर विशेष ध्यान दे रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2023 से 2025 के बीच आई प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। इसके साथ ही 1.36 लाख कर्मचारियों के हित में पहली कैबिनेट बैठक में पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की गई।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए 3 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल ने उल्लेखनीय प्रगति की है और राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण में देशभर में पांचवां स्थान प्राप्त किया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से युक्त राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं और इस वित्त वर्ष में 49 विद्यालयों के निर्माण व उन्नयन के लिए 99 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि ऊना में 2500 करोड़ रुपये की लागत से बल्क ड्रग पार्क परियोजना शुरू हो चुकी है। इसके अलावा जल आपूर्ति, स्वास्थ्य और हवाई अड्डा विस्तार सहित कई बड़ी परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में “चिट्टा मुक्त हिमाचल” अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने युवाओं से इस अभियान में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ सूचना देने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा और उनकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
उन्होंने बताया कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना के तहत 680 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें ई-टैक्सी खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।

शिमला शहर की पेयजल समस्या के समाधान को लेकर उन्होंने जानकारी दी कि सतलुज नदी से जल आपूर्ति परियोजना पर लगभग 600 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे प्रतिदिन 42 एमएल पानी उपलब्ध होगा, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 67 एमएल तक किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्होंने उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। मुख्य अतिथि ने सभी प्रतिभागी स्कूलों को सम्मानित भी किया।
इसके अलावा उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस कर्मियों और कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया, जिनमें नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई और मानव सेवा के कार्यों के लिए विशेष योगदान देने वाले अधिकारी शामिल रहे।
इस अवसर पर रजनी पाटिल, विनय कुमार, हरीश जनारथा सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। हिमाचल दिवस का यह समारोह प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विकास यात्रा और जनभागीदारी का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आया।
