हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के लिए वित्त वर्ष 2026-27 हेतु 76.07 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी बजट पारित किया गया है। यह बजट तकनीकी शिक्षा, शोध और नवाचार को नई दिशा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस बजट को कुलपति एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन की अध्यक्षता में आयोजित वित्त समिति की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई, जिसे बाद में विश्वविद्यालय के शासी मंडल (बीओडी) ने भी अनुमोदित किया।
🎓 शिक्षा और नवाचार पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को नवाचार, शोध और सह-शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना भी है। उन्होंने कहा कि यह बजट विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को गति देगा और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करेगा।
🔬 शोध और पीएचडी कार्यक्रम की शुरुआत
कुलपति डॉ. अभिषेक जैन ने बताया कि विश्वविद्यालय जल्द ही पीएच.डी. कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है, जिसे परिसर के साथ-साथ संबद्ध संस्थानों में भी लागू किया जाएगा। यह पहल प्रदेश में शोध संस्कृति को मजबूत करेगी और उच्च शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
💰 शोध और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विशेष प्रावधान
बजट में पहली बार शोध एवं नवाचार के लिए विशेष प्रावधान किया गया है:
- आधुनिक प्रयोगशालाओं और तकनीकी अवसंरचना के लिए 3 करोड़ रुपये
- पुस्तकों, ई-बुक्स और शोध पत्रिकाओं के लिए 1 करोड़ रुपये
यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय गुणवत्ता आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
🏅 मानद पीएचडी और प्रोत्साहन योजना
विश्वविद्यालय अकादमिक और सामाजिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को मानद पीएचडी उपाधि प्रदान करेगा। साथ ही, पीएचडी गाइड को प्रत्येक शोधार्थी के सफल शोध पूर्ण होने पर 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जिससे शोध कार्य को बढ़ावा मिलेगा।
🏫 छात्रों के समग्र विकास पर जोर
छात्रों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का बजट 25 लाख से बढ़ाकर 55 लाख रुपये कर दिया गया है।
इसके अलावा:
- छात्र क्लब और कैंपस प्लेसमेंट
- सॉफ्ट स्किल विकास
- औद्योगिक प्रशिक्षण
- लैंगिक संवेदनशीलता कार्यक्रम
जैसी गतिविधियों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।
🚀 उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा
विश्वविद्यालय अब केवल नौकरी देने के बजाय छात्रों को रोजगार सृजन की दिशा में भी तैयार कर रहा है।
इस दिशा में:
- उद्यमिता विकास कार्यक्रम के लिए 2 करोड़ रुपये
- औद्योगिक अनुभव एवं प्रशिक्षण के लिए 1 करोड़ रुपये
- छात्र गतिविधियों एवं कौशल विकास के लिए 70 लाख रुपये
का प्रावधान किया गया है।
📈 व्यावहारिक शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय में औद्योगिक अनुभव और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल भी हासिल कर सकें। इससे वे आत्मनिर्भर बनेंगे और उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार होंगे।