पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य “फाइनेंशियल इमरजेंसी” की ओर बढ़ रहा है और मौजूदा सरकार इसे संभालने में पूरी तरह विफल रही है। सिरमौर जिला के पांवटा साहिब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की।
💰 आर्थिक संकट पर सरकार घिरी
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में आर्थिक हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब उच्च अधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों की सैलरी तक डेफर करनी पड़ रही है, जो किसी भी सरकार की वित्तीय स्थिति को दर्शाने के लिए पर्याप्त है।
⚠️ अनावश्यक खर्चों का आरोप
उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में कांग्रेस सरकार ने आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
इसके विपरीत, सरकार ने अनावश्यक खर्च बढ़ाए, जिसका बोझ प्रदेश की जनता पर पड़ा है।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि:
- 6 सीपीएस बनाए गए
- कैबिनेट रैंक के एडवाइजर नियुक्त किए गए
- बड़ी संख्या में एडवोकेट जनरल, एडिशनल और डिप्टी एडवोकेट जनरल नियुक्त किए गए
इसके बावजूद सरकार को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।
🏛️ “जिम्मेदारी से भाग रही सरकार”
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सैलरी डेफर करने का फैसला जिम्मेदारी से बचने का संकेत है। उन्होंने इसे “आर्थिक प्रबंधन की विफलता” करार दिया और कहा कि सरकार को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए थी, न कि इस तरह के कदम उठाने चाहिए।
👩⚖️ नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर भी निशाना
इस दौरान जयराम ठाकुर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी महिलाओं को उनका अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाएगा।
🚨 कानून-व्यवस्था पर भी सवाल
जयराम ठाकुर ने प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरेआम हत्याएं हो रही हैं, जिससे आम जनता में भय का माहौल है। उनके अनुसार, कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है और सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है।
📢 सरकार से जवाबदेही की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और अपनी नीतियों में सुधार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार स्थिति संभालने में असमर्थ है, तो मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए।