जिला हमीरपुर के भोरंज उपमंडल में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार और कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। उपायुक्त Gandharva Rathore गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि किसी भी बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। गर्भधारण से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक का यह समय उसके शारीरिक और मानसिक विकास की नींव तैयार करता है। यदि इस अवधि में बच्चे को संतुलित और पर्याप्त पोषण मिले तो वह भविष्य में स्वस्थ और सक्षम जीवन जी सकता है।
उपायुक्त वीरवार को भोरंज उपमंडल की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लदरौर और मुंडखर में आयोजित पोषण जागरूकता कार्यक्रमों को संबोधित कर रही थीं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा वर्करों ने भाग लिया।
मां की जागरूकता है बच्चे के पोषण की कुंजी
उपायुक्त ने कहा कि बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए मां की जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जन्म के बाद पहले छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह उसके लिए संपूर्ण और सर्वोत्तम आहार है। छह माह के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ-साथ अन्य पौष्टिक आहार देना भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान दें और उन्हें संतुलित आहार उपलब्ध करवाएं। सही पोषण न केवल बच्चों के शारीरिक विकास को बेहतर बनाता है बल्कि उनकी सीखने और समझने की क्षमता को भी मजबूत करता है।
पारंपरिक भोजन और मोटे अनाज का महत्व
गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि हमारे पारंपरिक व्यंजन और मोटे अनाज अनेक आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। आधुनिक खान-पान की आदतों के कारण कई परिवार इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों से दूर हो गए हैं, जबकि ये बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने बताया कि मोटे अनाज, विशेषकर रागी, कैल्शियम, आयरन, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत है। यदि इसे नियमित भोजन में शामिल किया जाए तो बच्चों में कुपोषण की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
भोरंज में 454 बच्चे कम वजन और कुपोषण से प्रभावित
उपायुक्त ने जानकारी दी कि भोरंज उपमंडल में लगभग 454 बच्चे कम वजन वाले अथवा कुपोषण की श्रेणी में पाए गए हैं। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने भोरंज में पायलट आधार पर न्यूट्रिशनल इंटरवेंशन (पोषण हस्तक्षेप) कार्यक्रम आरंभ किया है। इस कार्यक्रम के तहत छोटे बच्चों को रागी का पौष्टिक पाउडर उपलब्ध करवाया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना तथा कुपोषण की समस्या को कम करना है। कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने महिलाओं के साथ रागी पाउडर के उपयोग और इसके स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से चर्चा की।
विशेषज्ञों ने दी पौष्टिक आहार की जानकारी
कार्यक्रम में विभिन्न अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भी महिलाओं को पोषण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। अतिरिक्त उपायुक्त Abhishek Garg अभिषेक गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी Dr. Ajay Atri डॉ. अजय अत्री, जिला कार्यक्रम अधिकारी Anil Kumar अनिल कुमार तथा सीडीपीओ Sunil Kumar सुनील कुमार ने भी महिलाओं को बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारियां दीं। इसके अलावा Chinmaya Rural Development Organisation (कॉर्ड), सिद्धबाड़ी धर्मशाला के विशेषज्ञों अनिता ठाकुर और सुनील कुमार ने रागी पाउडर तथा अन्य पौष्टिक व्यंजनों की उपयोगिता और उन्हें तैयार करने के तरीकों की जानकारी साझा की।
कुपोषण मुक्त समाज की दिशा में प्रयास
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि कुपोषण केवल स्वास्थ्य विभाग या महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि परिवार, समुदाय और सरकारी संस्थाएं मिलकर कार्य करें तो बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सकता है। उपायुक्त ने कहा कि पोषण अभियान का उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना नहीं बल्कि व्यवहार में बदलाव लाना भी है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे पौष्टिक आहार, स्तनपान और बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच जैसे विषयों को गंभीरता से लें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भोरंज में शुरू किया गया यह पोषण हस्तक्षेप कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव लाएगा और कुपोषण की समस्या को कम करने में प्रभावी साबित होगा।
