नोहराधार में महिलाओं और किशोरियों को योजनाओं की जानकारी

rakesh nandan

04/06/2026

महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला सिरमौर द्वारा महिलाओं और किशोरियों को सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नोहराधार, विकास खंड संगड़ाह में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, किशोरियों, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों और स्कूली छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम का आयोजन मिशन शक्ति योजना के अंतर्गत किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करवाना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। उन्होंने छात्राओं और महिलाओं से शिक्षा, आत्मनिर्भरता और जागरूकता को अपनाने का आह्वान किया।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना पर दिया गया विशेष बल

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि बेटा और बेटी दोनों समान हैं और समाज में किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।

प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि गर्भ में लिंग जांच करवाना और कन्या भ्रूण हत्या करना कानूनन अपराध है। PCPNDT Act के तहत ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का आग्रह किया गया।

मासिक धर्म स्वच्छता पर जागरूकता

किशोरियों और महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि माहवारी कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इस दौरान स्वच्छता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

उन्हें नियमित रूप से सैनिटरी नैपकिन बदलने, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने तथा संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी गई। साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा की जानी चाहिए और इससे जुड़ी सामाजिक झिझक को समाप्त किया जाना चाहिए।

दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता

कार्यक्रम में दहेज प्रथा के दुष्प्रभावों और कानूनी प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि दहेज मांगना, देना और लेना तीनों ही अपराध हैं।

अधिकारियों ने Dowry Prohibition Act 1961 दहेज निषेध अधिनियम 1961 की जानकारी देते हुए कहा कि समाज को इस कुप्रथा के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करना चाहिए और बेटियों के सम्मान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

वन स्टॉप सेंटर ‘सखी’ की जानकारी

महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए संचालित One Stop Centre Sakhi वन स्टॉप सेंटर ‘सखी’ के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रतिभागियों को बताया गया कि हिंसा, उत्पीड़न या किसी अन्य संकट की स्थिति में महिलाओं को जिला अस्पताल नाहन स्थित वन स्टॉप सेंटर में पुलिस सहायता, चिकित्सीय सुविधा, कानूनी परामर्श, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और अस्थायी आश्रय जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं।

आंगनबाड़ी सह क्रेच और महिला हॉस्टल योजनाएं

कार्यक्रम के दौरान कामकाजी महिलाओं के लिए संचालित आंगनबाड़ी सह क्रेच (AWCC) योजना की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है।

इसके अतिरिक्त बाहर पढ़ाई या नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित और किफायती आवास सुविधा प्रदान करने वाली कामकाजी महिला हॉस्टल योजना के बारे में भी प्रतिभागियों को अवगत करवाया गया।

हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी

कार्यक्रम में महिलाओं को आपातकालीन सहायता सेवाओं की जानकारी भी प्रदान की गई। अधिकारियों ने बताया कि घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़ या किसी भी प्रकार की परेशानी की स्थिति में महिलाएं 24 घंटे संचालित महिला हेल्पलाइन नंबर 181 पर संपर्क कर सकती हैं।

आपात स्थिति में 112 नंबर पर कॉल कर तुरंत सहायता प्राप्त की जा सकती है।

विभिन्न अधिकारियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम में सुपरवाइजर Vinod Kumar विनोद कुमार, जिला समन्वयक Kritika Thakur कृतिका ठाकुर तथा जेंडर स्पेशलिस्ट Sonam Parmar सोनम परमार सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, नर्सिंग अधिकारियों, शिक्षकों और विभागीय कर्मचारियों ने सक्रिय सहयोग दिया।

कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं और किशोरियों को उनके अधिकारों, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक कर सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।