केंद्रीय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर कांग्रेस और INDI गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस विधेयक को भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव बताते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल नरेंद्र मोदी के विज़न और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा का प्रतिबिंब है, जिसमें महिलाओं को विकास यात्रा का नेतृत्वकर्ता बनाने पर जोर दिया गया है।
महिला सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में सत्ता संभालते ही प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सरकार गरीब, महिला, युवा और किसान को केंद्र में रखकर काम करेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, पिछले एक दशक में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो परिवर्तन हुए हैं, वे अभूतपूर्व हैं और इसका असर समाज के हर वर्ग में देखने को मिल रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ा बड़ा बदलाव
उन्होंने 15 अगस्त 2014 के प्रधानमंत्री के संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि लाल किले से शौचालय निर्माण की बात करना एक क्रांतिकारी सोच थी।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत देशभर में बड़े पैमाने पर शौचालयों का निर्माण हुआ, जिससे महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
उन्होंने कहा कि इससे बालिकाओं की शिक्षा में भी निरंतरता आई और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिला।
उज्ज्वला योजना से जीवन में बदलाव
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना ने करोड़ों महिलाओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति दिलाई है।
उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं घंटों धुएं में काम करती थीं, लेकिन अब वे समय बचाकर स्वरोजगार और अन्य गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं।
यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार का प्रतीक है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की क्षमता हमेशा से रही है, लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिल पाते थे।
मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज महिलाएं सिविल सेवाओं, तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और रक्षा सेवाओं में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि अब महिलाएं केवल भागीदारी नहीं कर रही हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का महत्व
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम है।
उन्होंने इसे समय की मांग बताते हुए कहा कि सरकार ने इसे गंभीरता से लागू करने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधाएं डालने की कोशिश की।
कांग्रेस पर तीखा प्रहार
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पिछले 50 वर्षों से महिला आरक्षण की बात करने के बावजूद पार्टी ने इसे लागू करने का साहस नहीं दिखाया।
उन्होंने कहा कि जब भाजपा सरकार ने ठोस समाधान पेश किया, तब कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते इस प्रक्रिया को रोकने का प्रयास किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ विश्वासघात करार दिया।
संगठन में महिलाओं की भागीदारी
उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने संगठन में पहले ही महिलाओं को 33 प्रतिशत से अधिक भागीदारी दी है, जबकि कांग्रेस अपने संगठन में भी ऐसा नहीं कर पाई है।
उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां महिलाओं को अवसर योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर मिलता है।
सरोज पांडे का बयान
इस अवसर पर सरोज पांडे ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को लंबे समय तक केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया।
प्रियंका गांधी के नारे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को अधिकार देने का समय आया, तब विपक्ष का समर्थन नजर नहीं आया।