हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग ने प्रारंभिक शिक्षा विभाग में टीजीटी (नॉन मेडिकल) के पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्ट कोड-25002 के तहत आयोजित भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। आयोग के सचिव डॉ. विक्रम महाजन ने बताया कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा और दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया के बाद योग्य उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया गया है।
🧾 हजारों उम्मीदवारों ने किया आवेदन
इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 15,983 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इनमें से 14,380 उम्मीदवारों ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में भाग लिया, जो इस भर्ती प्रक्रिया का पहला महत्वपूर्ण चरण था।
💻 999 उम्मीदवार पहुंचे दस्तावेज़ सत्यापन तक
कंप्यूटर आधारित परीक्षा के परिणाम के आधार पर 999 उम्मीदवारों को दस्तावेज़ों की जांच (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) के लिए चयनित किया गया। यह प्रक्रिया 16 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक आयोजित की गई, जिसमें उम्मीदवारों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की गहन जांच की गई।
✅ 333 उम्मीदवारों का अंतिम चयन
दस्तावेज़ सत्यापन के बाद कुल 333 उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया गया है। यह चयन पूरी तरह मेरिट और निर्धारित नियमों के आधार पर किया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
⚠️ कुछ पद खाली रह गए
आयोग के अनुसार, पात्र उम्मीदवारों की कमी के कारण कुछ पद खाली रह गए हैं।
इनमें शामिल हैं:
- ओबीसी (स्वतंत्रता सेनानी परिजन) के 6 पद
- एससी (स्वतंत्रता सेनानी परिजन) के 4 पद
इससे स्पष्ट है कि आरक्षित श्रेणियों में भी पात्र उम्मीदवारों की उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है।
🌐 वेबसाइट पर उपलब्ध परिणाम
आयोग ने यह भी जानकारी दी कि अंतिम परिणाम आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करवा दिया गया है। उम्मीदवार अपने नाम, रोल नंबर और प्राप्त अंकों के साथ परिणाम देख सकते हैं। 👉 HPRCA Official Website पर जाकर परिणाम देखा जा सकता है।
📊 पारदर्शी चयन प्रक्रिया
इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा किया गया है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा, दस्तावेज़ सत्यापन और मेरिट के आधार पर चयन—इन सभी चरणों के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों को चयनित किया गया है।
🎓 शिक्षा विभाग को मिलेगा लाभ
टीजीटी (नॉन मेडिकल) पदों पर चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति से प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को बेहतर शिक्षण सुविधाएं मिल सकेंगी।