सामान्य प्रशासन विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य में जनगणना-2027 डिजिटल माध्यम से दो चरणों में आयोजित की जाएगी। यह जानकारी नगर निगम आयुक्त पृथी पाल सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि जनगणना के प्रथम चरण के अंतर्गत 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना का कार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त नागरिकों को स्व-गणना की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
आयुक्त ने बताया कि स्व-गणना के लिए ऑनलाइन सुविधा 1 जून से 15 जून 2026 तक उपलब्ध रहेगी। नागरिक जनगणना स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।
पृथी पाल सिंह ने बताया कि जनगणना के दूसरे चरण में फरवरी 2027 से जनसंख्या गणना का कार्य शुरू किया जाएगा। इस दौरान योजना निर्माण, नीति निर्धारण, संसदीय एवं विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन तथा पंचायत और स्थानीय निकायों में आरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जनगणना अधिनियम, 1948 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति जनगणना अधिकारी द्वारा पूछे गए प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए वैधानिक रूप से बाध्य है। अधिभोगियों को जनगणना अधिकारियों को परिसर में प्रवेश करने और जनगणना चिन्ह अथवा संख्यांक अंकित करने की अनुमति भी देनी होगी।
इसके अतिरिक्त आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक संस्थानों के अधिभोगियों अथवा प्रबंधकों को जनगणना अनुसूची भरकर हस्ताक्षरित रूप में वापस करनी होगी।
आयुक्त ने बताया कि जनगणना के दौरान उत्तर देने से इनकार करना, गलत जानकारी देना, अधिकारियों के कार्य में बाधा उत्पन्न करना या जनगणना चिन्हों को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है। इसके लिए एक हजार रुपये तक जुर्माना या तीन वर्ष तक कारावास का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि जनगणना अभिलेख पूरी तरह गोपनीय रखे जाते हैं और इन्हें किसी भी सिविल या आपराधिक कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता।
पृथी पाल सिंह ने नागरिकों से अपील की कि वे जनगणना अधिकारियों को पूर्ण सहयोग दें और सही एवं वास्तविक जानकारी उपलब्ध करवाएं, ताकि इन आंकड़ों का उपयोग प्रभावी योजना निर्माण, नीति निर्धारण और सार्वजनिक प्रशासन में किया जा सके।