हमीरपुर जिला के दोसड़का क्षेत्र के प्रगतिशील किसान परमिंद्र सिंह डडवाल की आधुनिक और मल्टीपल फार्मिंग अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने बुधवार को किसान के घर और खेतों का दौरा कर उनके द्वारा किए जा रहे खेती के नए प्रयोगों का निरीक्षण किया।
दौरे के दौरान उपायुक्त ने विभिन्न फसलों की पनीरी, औषधीय पौधों और बहुफसली पद्धति से उगाए जा रहे अन्य पौधों का अवलोकन किया। विशेष रूप से बांस, पुरानी पाइपों और अन्य वेस्ट मैटीरियल का उपयोग कर तैयार किए गए पौधों और संरचनाओं ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया।
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने किसान परमिंद्र सिंह डडवाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने खेती में इनोवेशन और संसाधनों के बेहतर उपयोग का शानदार उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि खेती में नए प्रयोग अपनाकर किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने किसान के ‘वेस्ट टू प्लेट’ मॉडल की विशेष रूप से प्रशंसा की। इस मॉडल के तहत वेस्ट मैटीरियल का उपयोग खेती में किया जा रहा है। पुरानी और अनुपयोगी सामग्री को खेती में उपयोगी बनाकर लागत कम करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में यह एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है।
परमिंद्र सिंह डडवाल ने अपने खेतों में बहुफसली खेती को अपनाया है, जिसमें एक ही स्थान पर कई प्रकार की फसलें और पौधे लगाए गए हैं। इससे जमीन का बेहतर उपयोग हो रहा है और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी मिल रहे हैं।
उपायुक्त ने कहा कि इस प्रकार की खेती आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में नई दिशा दे सकती है। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को ऐसे नवाचारों को अन्य किसानों तक पहुंचाने और उन्हें आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए।
इस अवसर पर आतमा परियोजना हमीरपुर के परियोजना निदेशक राकेश धीमान, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. डीडी शर्मा और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
इसके बाद उपायुक्त ने हथली खड्ड के निकट कृषि विभाग परिसर में विकसित की जा रही राज्य उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला का निरीक्षण भी किया। उन्होंने प्रयोगशाला में लगाए जा रहे अत्याधुनिक उपकरणों का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ इसके जल्द संचालन को लेकर चर्चा की।
प्रशासन का मानना है कि इस प्रयोगशाला के शुरू होने से किसानों को उर्वरकों की गुणवत्ता जांच की बेहतर सुविधा मिलेगी और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।