अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में अम्ब और गगरेट में योग एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
ऊना। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में आयुष विभाग द्वारा उपमंडल अम्ब और गगरेट के विभिन्न शैक्षणिक एवं सरकारी संस्थानों में योग, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, योग के महत्व को समझाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है।
उपमंडल आयुष चिकित्सा अधिकारी अम्ब (भंजाल) डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन से पूर्व विभिन्न संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा बेहतर स्वास्थ्य के लिए नियमित अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इसी क्रम में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नेरियां और पुलिस थाना गगरेट में विशेष योग सत्र आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों ने भाग लिया। योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की तकनीकों का अभ्यास करवाया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि नियमित योगाभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचाव में भी सहायक होता है। योग प्रशिक्षकों ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी और प्राकृतिक समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आईटीआई नेरियां परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण और हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। प्रतिभागियों को पौधों की देखभाल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर आयोजित पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण मानव जीवन की मूल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और मानव स्वास्थ्य का आपसी संबंध अत्यंत गहरा है। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो समाज भी स्वस्थ और समृद्ध रहेगा।
उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का आग्रह किया।
डॉ. शर्मा ने प्लास्टिक के उपयोग को कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण आज वैश्विक स्तर पर गंभीर समस्या बन चुका है। इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को अपनाना आवश्यक है। इसके अलावा उन्होंने जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और स्वच्छता को भी पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के माध्यम से पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है।
वक्ताओं ने विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक बनाने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सामुदायिक स्तर पर चलाए जाने वाले अभियान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम में डॉ. नरेंद्र, डॉ. इति श्री, डॉ. परमजीत नंदा तथा विभिन्न योग प्रशिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने प्रतिभागियों को योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत स्तर पर योगदान देने का संदेश दिया।
डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि आयुष विभाग द्वारा 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस तक विभिन्न कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक स्थलों पर योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन लगातार जारी रहेगा। इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।