थुनाग कॉलेज के छात्रों का शैक्षिक भ्रमण, बढ़ा ज्ञान

rakesh nandan

24/04/2026

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला स्थित डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के महाविद्यालय थुनाग, गोहर (गुढ़ेरी) के बीएससी (ऑनर्स) वानिकी के छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया गया। यह भ्रमण 20 अप्रैल 2026 से 23 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें कुल 38 छात्रों ने भाग लिया। इस भ्रमण का उद्देश्य छात्रों को उनके पाठ्यक्रम से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान से अवगत कराना और उन्हें विभिन्न अनुसंधान संस्थानों की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर प्रदान करना था।

इस शैक्षिक भ्रमण के दौरान छात्रों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों का दौरा करवाया गया। इनमें Forest Research Institute, Patanjali University, Patanjali Yogpeeth, पतंजलि हर्बल गार्डन एवं अनुसंधान केंद्र तथा Patanjali Research Foundation प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन संस्थानों में छात्रों को वन विज्ञान, औषधीय पौधों और जैव विविधता से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी गई।

भ्रमण के दौरान छात्रों को वन अनुसंधान संस्थान में वन उत्पाद प्रभाग, जाइलारियम (लकड़ी संग्रह), गैर-लकड़ी वन उत्पाद संग्रहालय और वनस्पति उद्यान का अवलोकन कराया गया। इसके अलावा, उन्हें लकड़ी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सेल्युलोज एवं कागज प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इससे छात्रों को वन आधारित उद्योगों और उनके उपयोग के बारे में गहरी समझ प्राप्त हुई।

पतंजलि समूह के संस्थानों में छात्रों को औषधीय और सुगंधित पौधों के उत्पादन, संरक्षण और प्रसंस्करण के बारे में जानकारी दी गई। यहां उन्होंने जैव विविधता संरक्षण इकाई, हर्बल प्रसंस्करण इकाइयों और मूल्यवर्धन की प्रक्रियाओं को नजदीक से देखा। इससे उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किस प्रकार औद्योगिक और व्यावसायिक स्तर पर किया जाता है।

इस भ्रमण के दौरान छात्रों के साथ कॉलेज के वैज्ञानिक डॉ. सुनील मारपा और सहायक प्रोफेसर डॉ. बंदना धीमान भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के भ्रमण से छात्रों की विषय के प्रति समझ और रुचि दोनों में वृद्धि होती है।

छात्रों को इस दौरान विशेषज्ञों से सीधे बातचीत करने का भी अवसर मिला, जिससे उन्होंने अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए और नई जानकारी हासिल की। विशेषज्ञों ने उन्हें वन उत्पादों के संरक्षण, उपयोग और भविष्य की संभावनाओं के बारे में भी मार्गदर्शन दिया।

इस अनुभवात्मक भ्रमण से छात्रों की वन उत्पादों, उनके उपयोग और संबंधित उद्योगों के प्रति समझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही, इससे उन्हें अपने भविष्य के करियर विकल्पों के बारे में भी स्पष्टता मिली है।

अंततः, यह कहा जा सकता है कि यह शैक्षिक भ्रमण छात्रों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हुआ। इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल छात्रों के ज्ञान को बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें वास्तविक दुनिया के अनुभवों से भी जोड़ते हैं, जो उनके समग्र विकास के लिए बेहद आवश्यक है।