रक्तदान को महादान कहा जाता है और यह किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है। जिला सिरमौर में रक्तदान के क्षेत्र में कार्य कर रहे स्वयंसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। मई 2026 के दौरान रक्तदाताओं के सहयोग से कुल 64 यूनिट रक्तदान कर विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन मरीजों की सहायता की गई।

1 मई 2026 से 31 मई 2026 तक चले इस सेवा अभियान के दौरान अधिकांश रक्तदान मेडिकल कॉलेज नाहन में भर्ती मरीजों की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया। रक्तदाताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयासों से अनेक मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सका, जिससे उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण सहायता मिली।

माह भर के दौरान विभिन्न रक्त समूहों के अनुसार रक्तदान किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ए पॉजिटिव रक्त समूह की 11 यूनिट, ओ पॉजिटिव की 8 यूनिट, एबी पॉजिटिव की 3 यूनिट, बी पॉजिटिव की 14 यूनिट, एबी नेगेटिव की 1 यूनिट, ओ नेगेटिव की 1 यूनिट तथा बी नेगेटिव की 3 यूनिट रक्तदान के माध्यम से उपलब्ध कराई गईं। इन रक्त इकाइयों ने कई गंभीर मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रक्तदान अभियान केवल नाहन तक सीमित नहीं रहा। समूह के सदस्य सुनील वर्मा ने मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल में जाकर बी पॉजिटिव रक्तदान किया। वहीं सदस्य प्रवेश बंसल ने पीजीआई चंडीगढ़ में बी पॉजिटिव रक्तदान कर मरीज की सहायता की। इस प्रकार समूह के सदस्य जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों और शहरों में भी जाकर रक्तदान करने के लिए आगे आए।

रक्तदान सेवा के विस्तार में संगठन के पदाधिकारियों और सक्रिय सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दुर्लभ और आपातकालीन रक्त समूहों की आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न अस्पतालों में रक्त की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। पीजीआई चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में तीन यूनिट रक्त की आवश्यकता को समूह के अध्यक्ष सलमान खान के प्रयासों से पूरा किया गया।

इसी प्रकार सामाजिक कार्यकर्ता अखिल माहेश्वरी ने मोहाली और पंचकूला में जिला सिरमौर के मरीजों के लिए चार यूनिट रक्त की व्यवस्था करवाई। उनके प्रयासों से जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हुआ और उपचार में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई।
समूह के सक्रिय सदस्य कपिल नेगी ने भी कई स्थानों पर रक्त की जरूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आईजीएमसी शिमला में बी पॉजिटिव रक्त की दो यूनिट तथा ओ पॉजिटिव रक्त की छह यूनिट उपलब्ध करवाने में सहयोग किया। इसके अतिरिक्त पीजीआई चंडीगढ़ में एबी पॉजिटिव रक्त समूह की दो यूनिट की आवश्यकता को भी पूरा कराया।
देहरादून में भी जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था की गई। सामाजिक कार्यकर्ता नदीम खान ने चार यूनिट रक्त की आवश्यकता को पूरा करवाने में सहयोग किया। इससे स्पष्ट होता है कि रक्तदान सेवा का यह नेटवर्क केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न शहरों और अस्पतालों में मरीजों की सहायता के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

रक्तदान अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सेवा केवल व्यक्तिगत प्रयासों से संभव नहीं होती, बल्कि इसके पीछे अनेक स्वयंसेवकों, रक्तदाताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की दिन-रात की मेहनत होती है। जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होती है, तब समूह के सदस्य तुरंत सक्रिय होकर रक्तदाता खोजने और रक्त उपलब्ध करवाने का प्रयास करते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक यूनिट रक्त कई मरीजों के जीवन को बचाने में सहायक हो सकता है। दुर्घटना, ऑपरेशन, प्रसव, कैंसर, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्तदान जीवनदायिनी भूमिका निभाता है। इसलिए नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान को समाज में बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

मई माह में 64 यूनिट रक्तदान और विभिन्न अस्पतालों में रक्त की अतिरिक्त व्यवस्था कर इस समूह ने सामाजिक सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। समूह ने सभी रक्तदाताओं, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी तरह जरूरतमंद मरीजों की सहायता जारी रखने का संकल्प दोहराया है।