मंडी में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ, किसानों को जागरूक किया

rakesh nandan

02/06/2026

मंडी जिला में किसानों को मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया गया है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा) परियोजना के तहत शुरू किए गए इस अभियान का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर से किया गया। यह अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे हिमाचल प्रदेश में चलाया जाएगा।

परियोजना निदेशक (आत्मा) राकेश पटियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार आयोजित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना है।

अभियान के पहले चरण में बल्ह उपमंडल की ग्राम पंचायत बैहल, पस्ता और सदर क्षेत्र की रंधाड़ा पंचायत में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के साथ संवाद स्थापित किया। इस दौरान किसानों को कृषि क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए मृदा परीक्षण के आधार पर ही पोषक तत्वों और उर्वरकों का उपयोग किया जाना चाहिए।

राकेश पटियाल ने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और लंबे समय में उत्पादन क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग की आदत विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन से खेती की लागत कम होती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

अभियान के दौरान किसानों को जैविक खेती और प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी। कृषि विशेषज्ञ किसानों को बताएंगे कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए किस प्रकार कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसके साथ ही हरी खाद के उपयोग और जैविक पदार्थों के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपाय भी समझाए जाएंगे।

‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत पूरे महीने गांव-गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अंतर्गत किसान गोष्ठियां, प्रशिक्षण शिविर, खेत प्रदर्शन और तकनीकी परामर्श कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती के नए तरीकों से अवगत कराया जाएगा।

राकेश पटियाल ने बताया कि अभियान के दौरान पंचायत स्तर पर गठित समितियों की नियमित बैठकें भी आयोजित होंगी। इन बैठकों में किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने, जल संरक्षण करने और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे कृषि उत्पादन में सुधार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य किसानों की कृषि लागत को कम करना भी है। विशेषज्ञ किसानों को ऐसे उपायों की जानकारी देंगे जिनसे उर्वरकों, कीटनाशकों और अन्य कृषि निवेशों पर होने वाला खर्च कम किया जा सके। इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।

इस अभियान में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगी। कृषि विज्ञान केंद्र विभिन्न सहभागी संस्थाओं के लिए समन्वयक और सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करेंगे। कृषि विभाग, बागवानी विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र और आत्मा परियोजना संयुक्त रूप से अभियान को सफल बनाने के लिए कार्य करेंगे।

अभियान के दौरान एचपी-अग्रिस्टैक परियोजना के तहत किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल फसल सर्वेक्षणों का अनुमोदन और विभिन्न कृषि योजनाओं से संबंधित प्रक्रियाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। इससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी।

राकेश पटियाल ने किसानों से अपील की कि वे अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें और वैज्ञानिक तथा प्राकृतिक कृषि तकनीकों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है। यदि किसान आज टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाते हैं तो भविष्य में कृषि क्षेत्र अधिक मजबूत और लाभकारी बन सकेगा।

‘खेत बचाओ अभियान’ केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों को पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान किसानों को आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती के बीच संतुलन स्थापित कर टिकाऊ कृषि मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।