एसएफआई ने सस्ती प्रिंटिंग सुविधा बंद करने का किया विरोध

rakesh nandan

26/05/2026

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कैंपस इकाई ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय में संचालित कम लागत वाली प्रिंटिंग सुविधा पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध किया है। संगठन ने इस संबंध में पुस्तकालयाध्यक्ष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग उठाई।

एसएफआई कैंपस संयुक्त सचिव किशोर कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब छात्र पहले से ही बढ़ी हुई फीस और अन्य शुल्कों के आर्थिक बोझ से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा शुल्क, छात्रावास शुल्क, पुनर्मूल्यांकन शुल्क और अन्य कई शुल्कों में बढ़ोतरी के कारण छात्रों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में वर्षों से उपलब्ध कम दरों वाली प्रिंटिंग और ज़ेरॉक्स सुविधा हजारों छात्रों के लिए शैक्षणिक सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम रही है। विशेष रूप से गरीब, ग्रामीण, मेहनतकश और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले छात्र अपनी पढ़ाई से जुड़े जरूरी दस्तावेजों की प्रिंटिंग के लिए इसी सुविधा पर निर्भर रहते हैं।

किशोर कुमार के अनुसार छात्र असाइनमेंट, शोध-पत्र, डिसर्टेशन, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, सेमिनार पेपर, जर्नल, प्रवेश पत्र और परीक्षा प्रपत्र जैसे जरूरी दस्तावेज कम लागत में प्रिंट करवा पाते थे। अब इस सुविधा पर रोक लगने से छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर के बाहर निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ेगा, जहां प्रिंटिंग की लागत काफी अधिक है।

एसएफआई ने आरोप लगाया कि जब छात्र पहले से बढ़ी हुई फीस के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, तब सस्ती प्रिंटिंग सुविधा को सीमित करना छात्र हितों के खिलाफ कदम है। संगठन ने मांग की कि पुस्तकालय में पूर्ववत कम लागत वाली प्रिंटिंग सुविधा बहाल की जाए।

संगठन ने यह भी कहा कि छात्रों को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय से पहले छात्र प्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए।

एसएफआई उपाध्यक्ष कॉमरेड आशीष ने कहा कि विश्वविद्यालय पुस्तकालय केवल किताबों तक सीमित संस्थान नहीं है, बल्कि यह छात्रों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने का केंद्र है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाने की बजाय इस प्रकार की सुविधाओं पर रोक लगाना विश्वविद्यालय प्रशासन की छात्र कल्याण नीतियों पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो एसएफआई छात्र हितों और सस्ती शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए अपने लोकतांत्रिक आंदोलन को और तेज करेगा।