Students’ Federation of India की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा शुक्रवार को कला संकाय विभाग में फीस वृद्धि के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रस्तावित फीस बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई।
एसएफआई ने आरोप लगाया कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लगातार फीस बढ़ाई जा रही है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। संगठन का कहना है कि शिक्षा हर छात्र का मौलिक अधिकार है, लेकिन सरकार और प्रशासन शिक्षा को महंगा बनाकर छात्रों को उच्च शिक्षा से दूर करने का काम कर रहे हैं।
धरना प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि फीस वृद्धि के कारण हजारों विद्यार्थी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कई छात्रों को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। संगठन ने कहा कि यदि समय रहते इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो आने वाले समय में बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं।

एसएफआई के सचिवालय साथी अखिल ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 28 अप्रैल 2026 को आयोजित एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में 30 से 40 प्रतिशत फीस वृद्धि का प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने कहा कि एसएफआई इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करती है क्योंकि इससे मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि फीस वृद्धि लागू होने के बाद गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में पढ़ाई करना और कठिन हो जाएगा। उनका कहना था कि सरकारी शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य छात्रों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना होना चाहिए, न कि शिक्षा को व्यापार का माध्यम बनाना।
आर्ट फैकल्टी के प्रधान ने भी प्रदर्शन के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा कि शिक्षा को व्यापार की वस्तु नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षण संस्थानों का दायित्व है कि वे छात्रों को कम खर्च में बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाएं। लेकिन वर्तमान में फीस वृद्धि के फैसले छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केवल ट्यूशन फीस ही नहीं, बल्कि हॉस्टल फीस, परीक्षा शुल्क, बस शुल्क और अन्य खर्चों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों दोनों की परेशानियां बढ़ रही हैं। कई परिवार पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और ऐसे में फीस बढ़ोतरी का निर्णय छात्रों के लिए मुश्किलें और बढ़ा देगा।
एसएफआई नेताओं ने प्रदेश सरकार पर शिक्षा बजट में कटौती करने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं करवाने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों पर आर्थिक बोझ डालने वाले फैसले ले रहा है। संगठन ने कहा कि सरकार को शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाना चाहिए ताकि छात्रों को राहत मिल सके।

प्रदर्शन के दौरान एसएफआई ने मांग की कि प्रस्तावित फीस वृद्धि को तुरंत वापस लिया जाए और शिक्षा के निजीकरण एवं व्यापारीकरण पर रोक लगाई जाए। संगठन का कहना है कि शिक्षा को केवल आर्थिक लाभ का माध्यम नहीं बनाया जा सकता।
अंत में छात्र नेता जनेश ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने फीस वृद्धि वापस नहीं ली तो एसएफआई आने वाले समय में उग्र आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि संगठन विश्वविद्यालय के प्रत्येक छात्र को लामबंद करेगा और आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब तक फीस वृद्धि का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक एसएफआई अपना आंदोलन जारी रखेगी। छात्र नेताओं ने प्रशासन से जल्द वार्ता कर छात्रों की समस्याओं का समाधान निकालने की मांग भी की।
विश्वविद्यालय परिसर में हुए इस प्रदर्शन के बाद फीस वृद्धि का मुद्दा छात्रों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर छात्र संगठनों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
