भाजपा के राज्यसभा सांसद Harsh Mahajan ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज कर्ज, आर्थिक बदहाली, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। साथ ही उन्होंने प्रदेशवासियों से आगामी नगर निगम, जिला परिषद, पंचायत समिति और पंचायत चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को समर्थन देने की भावनात्मक अपील भी की।
हर्ष महाजन ने कहा कि यह चुनाव केवल स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के भविष्य को बचाने का महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मौका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के पास पांच वर्षों में एक बार ऐसा अवसर आता है, जब वह अपने वोट के माध्यम से सरकार को स्पष्ट राजनीतिक संदेश दे सकती है।
भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रदेश की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई, नए टैक्स, विकास कार्यों में रुकावट और जनता पर आर्थिक बोझ डालने वाली नीतियों के कारण हर वर्ग परेशान है। उनके अनुसार कर्मचारी, किसान, व्यापारी, बेरोजगार युवा और महिलाएं सरकार की नीतियों से निराश हैं।
हर्ष महाजन ने कहा कि यदि किसी को सरकार की आर्थिक नीतियों पर संदेह है तो वह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट पढ़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 12 निगम और बोर्ड इस समय 6454 करोड़ रुपये से अधिक के घाटे में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अकेला बिजली बोर्ड 3246 करोड़ रुपये से अधिक के घाटे में पहुंच चुका है, जबकि हिमाचल पथ परिवहन निगम पर लगभग 10,966 करोड़ रुपये का बोझ है। इसके अलावा वित्त निगम पर भी 180 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी बताई गई है।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर भी सवाल उठाए। महाजन ने कहा कि सरकार ने OPS बहाल तो कर दी, लेकिन उसके लिए अलग से कोई पेंशन फंड नहीं बनाया गया। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में इसका पूरा वित्तीय बोझ सीधे प्रदेश के खजाने पर पड़ेगा और इससे आर्थिक संकट और अधिक गहरा सकता है।
भाजपा सांसद ने कहा कि CAG रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में हिमाचल प्रदेश को 5558 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ, जबकि राजकोषीय घाटा 11,266 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि FRBM एक्ट के तहत यह सीमा 3.5 प्रतिशत होनी चाहिए थी, लेकिन हिमाचल में यह बढ़कर 5.43 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उनके अनुसार इसका मतलब यह है कि सरकार अपनी आय से कहीं अधिक खर्च कर रही है और लगातार कर्ज पर निर्भर हो चुकी है।
हर्ष महाजन ने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब सरकार पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज लेने पर मजबूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कुल आय का लगभग 72 प्रतिशत हिस्सा केवल वेतन, पेंशन और ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। ऐसे में विकास कार्यों, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संसाधन कम पड़ रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के सात बड़े सरकारी उपक्रमों की नेटवर्थ नकारात्मक हो चुकी है। उनका दावा था कि इन संस्थानों का घाटा इतना बढ़ चुका है कि उनकी मूल पूंजी तक समाप्त हो गई है। उन्होंने बिजली बोर्ड और परिवहन निगम का उदाहरण देते हुए कहा कि इन संस्थानों पर बढ़ता कर्ज अंततः प्रदेश की जनता पर ही बोझ बनेगा।
भाजपा सांसद ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि यह केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की वास्तविक स्थिति है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जनता नहीं जागी तो आने वाले समय में विकास कार्य और रोजगार के अवसर गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
हर्ष महाजन ने कांग्रेस पर झूठी गारंटियां देने और जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा विकास, पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश की जनता निकाय और पंचायत चुनावों में कांग्रेस सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।