पांवटा में 10 हेक्टेयर में खैर-शीशम का जंगल तैयार

rakesh nandan

25/04/2026

जिला सिरमौर के पांवटा साहिब क्षेत्र में वन विभाग द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल अब सफल होती नजर आ रही है। वर्ष 2021 में शुरू किए गए पौधारोपण अभियान के तहत आरएफ गिरी जंगल में खैर और शीशम के पेड़ लगाए गए थे, जो अब धीरे-धीरे विकसित होकर एक छोटे जंगल का रूप लेने लगे हैं।

यह परियोजना पांवटा साहिब के गिरी जंगल क्षेत्र में चलाई गई, जो गिरी नदी के समीप स्थित है। नदी के किनारे होने के कारण यहां भूमि कटाव की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी। बरसात के मौसम में पानी के तेज बहाव के कारण मिट्टी का क्षरण होता था, जिससे आसपास के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता था।

इस समस्या के समाधान के लिए वन विभाग ने वर्ष 2021 में यहां 10 हेक्टेयर भूमि पर खैर और शीशम के पौधे लगाने का निर्णय लिया। शुरुआत में यह एक प्रयोगात्मक कदम था, लेकिन अब इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। पौधे अब तेजी से बढ़ रहे हैं और क्षेत्र में हरियाली लौटने लगी है।

वन विभाग पांवटा साहिब के डीएफओ वेद प्रकाश शर्मा ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य न केवल हरित क्षेत्र को बढ़ाना था, बल्कि भूमि कटाव को रोकना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना भी था। उन्होंने बताया कि खैर और शीशम जैसे पेड़ मजबूत जड़ प्रणाली वाले होते हैं, जो मिट्टी को बांधकर रखने में मदद करते हैं और कटाव को कम करते हैं।

डीएफओ ने यह भी बताया कि अब इस क्षेत्र में लगाए गए पौधे अच्छे से विकसित हो रहे हैं और भूमि कटाव में काफी हद तक कमी आई है। इसके साथ ही इस पहल ने क्षेत्र को एक नई पहचान दी है और यह पर्यावरण संरक्षण का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है।

वन विभाग द्वारा इस प्रकार की गतिविधियां केवल एक स्थान तक सीमित नहीं हैं। विभाग द्वारा वन परीक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली खाली पड़ी भूमि पर भी बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य जंगलों का विस्तार करना और जैव विविधता को संरक्षित रखना है।

इस अभियान के तहत विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों का रोपण किया जा रहा है, ताकि पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखा जा सके। साथ ही, यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी सहायक सिद्ध हो रही है।

स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की है और इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। उनका मानना है कि यदि इस प्रकार के प्रयास लगातार जारी रहे, तो आने वाले समय में क्षेत्र में हरियाली और प्राकृतिक संतुलन को और मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, नदी किनारे पौधारोपण करना भूमि कटाव को रोकने के लिए एक प्रभावी उपाय है। इससे न केवल मिट्टी सुरक्षित रहती है, बल्कि जल स्रोतों की गुणवत्ता भी बनी रहती है और आसपास के जीव-जंतुओं को भी अनुकूल वातावरण मिलता है।

वन विभाग का यह प्रयास यह दर्शाता है कि सही योजना और निरंतर प्रयास से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। पांवटा साहिब का यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

भविष्य में वन विभाग इस प्रकार के और भी प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रहा है, ताकि अधिक से अधिक क्षेत्र को हरित बनाया जा सके और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

इस सफल पहल ने यह साबित कर दिया है कि यदि सामूहिक प्रयास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो पर्यावरण से जुड़ी बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है।