‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ से सुलझाएं लंबित मामले

rakesh nandan

02/06/2026

अदालतों में वर्षों से लंबित मामलों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण निपटारे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के माध्यम से लोगों को अदालतों में लंबित मामलों का समाधान मध्यस्थता, सुलह और आपसी सहमति के जरिए करवाने का अवसर प्रदान किया जा रहा है।

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण (डीएलएसए) हमीरपुर के सचिव कुलदीप शर्मा ने बताया कि न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे के लिए मध्यस्थता एक प्रभावी और व्यवहारिक विकल्प है। इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों के बीच बातचीत के माध्यम से विवाद का समाधान खोजा जाता है, जिससे न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम करने के साथ-साथ लोगों को भी शीघ्र न्याय मिल सकता है।

उन्होंने बताया कि कई मामलों में पक्षकार वर्षों तक न्यायालयों के चक्कर लगाते रहते हैं। लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण समय और धन दोनों का अधिक खर्च होता है। इसके अतिरिक्त कई बार विवादों के कारण आपसी संबंध भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में मध्यस्थता और आपसी समझौते का रास्ता न केवल विवाद समाप्त करता है, बल्कि दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में भी मदद करता है।

कुलदीप शर्मा ने कहा कि ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली के प्रति जागरूक करना और उन्हें न्याय प्राप्त करने का सरल मार्ग उपलब्ध कराना है। इस अभियान के तहत इच्छुक पक्षकार अपने लंबित मामलों को मध्यस्थता के लिए भेजने हेतु संबंधित अदालत में आवेदन कर सकते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता की यह प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क होगी। इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभदायक साबित हो सकती है जो लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचना चाहते हैं और आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने के इच्छुक हैं।

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के अनुसार कई प्रकार के मामलों का समाधान मध्यस्थता के माध्यम से किया जा सकता है। इनमें वैवाहिक विवाद प्रमुख हैं, जहां पति-पत्नी के बीच उत्पन्न मतभेदों को बातचीत और समझौते के जरिए सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा चेक बाउंस के मामले, मोटर वाहन दुर्घटना से जुड़े दावे, बीमा विवाद तथा अन्य सिविल मामलों का भी मध्यस्थता के माध्यम से निपटारा संभव है।

कुलदीप शर्मा ने बताया कि आपराधिक मामलों में भी कुछ ऐसे अपराध होते हैं जिन्हें कानून के अनुसार समझौता योग्य (कंपाउंडेबल) माना गया है। ऐसे मामलों को भी मध्यस्थता के जरिए सुलझाया जा सकता है। इससे पक्षकारों को शीघ्र राहत मिलती है और न्यायालयों का समय भी बचता है।

उन्होंने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें किसी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से ऐसा समाधान निकाला जाता है जो सभी के लिए स्वीकार्य हो। इस कारण भविष्य में विवाद दोबारा उत्पन्न होने की संभावना भी कम हो जाती है।

सचिव ने यह भी जानकारी दी कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन भी किया जाता है। लोक अदालतें न्याय प्राप्ति का एक सरल, सस्ता और प्रभावी माध्यम हैं, जहां बड़ी संख्या में मामलों का एक ही दिन में निपटारा किया जाता है।

उन्होंने बताया कि अगली राष्ट्रीय लोक अदालत 12 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। इस दिन जिला हमीरपुर के सभी न्यायिक परिसरों में लोक अदालतें लगाई जाएंगी। इच्छुक व्यक्ति अपने मामलों को लोक अदालत में प्रस्तुत कर त्वरित समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान का लाभ उठाएं और आपसी सहमति के माध्यम से अपने विवादों का समाधान खोजने का प्रयास करें। इससे न केवल समय और धन की बचत होगी, बल्कि समाज में सौहार्द और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा मिलेगा।