हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला में आगामी दक्षिण-पश्चिम मानसून-2026 को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के सौजन्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त एवं प्राधिकरण के अध्यक्ष अपूर्व देवगन ने की। इस कार्यशाला का उद्देश्य मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए सभी विभागों की तैयारियों की समीक्षा करना और प्रभावी रणनीति तैयार करना था।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों द्वारा मानसून पूर्व तैयारियों का विस्तृत आकलन किया गया। अपूर्व देवगन ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय रहते तैयारियां करना ही आपदा से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
उपायुक्त ने कहा कि मानसून के दौरान जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही बिजली, पानी और सड़कों की स्थिति से संबंधित जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से समय पर जनता तक पहुंचाई जाएगी। रेड अलर्ट और ऑरेंज अलर्ट की स्थिति में विशेष सतर्कता बरतने और मशीनरी तथा मानव संसाधन की अग्रिम तैनाती के निर्देश भी दिए गए।
अपूर्व देवगन ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि अलर्ट के दौरान वे अपने कार्यस्थल न छोड़ें। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर शैक्षणिक संस्थानों को समय रहते बंद करने की अधिसूचना जारी की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
कार्यशाला में राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य सड़कों की स्थिति पर भी विशेष चर्चा की गई। एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग को कीरतपुर-मनाली, हमीरपुर-मंडी वाया कोटली और बिजनी-पधर जैसे प्रमुख मार्गों को मानसून के दौरान 24 घंटे खुला रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही सड़कों की नालियों और डंपिंग स्थलों की सफाई मानसून से पहले पूरी करने को कहा गया, ताकि जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
उपायुक्त ने पंडोह और लारजी डैम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पानी छोड़ने से पहले निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सायरन और सोशल मीडिया के माध्यम से समय पर सूचना दी जाए। इससे संभावित खतरे को कम किया जा सकेगा और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का समय मिल सकेगा।
इसके अलावा, उन्होंने जल शक्ति विभाग को निर्देश दिए कि गर्मियों के ड्राई स्पेल की स्थिति के लिए भी तैयार रहें। शैक्षणिक संस्थानों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पानी की टंकियों की सफाई, क्लोरिनेशन और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि पुलिस विभाग मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह और अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी डॉ. मदन कुमार ने पूर्व में आई आपदाओं के दौरान किए गए राहत और बचाव कार्यों पर प्रस्तुति दी।
आदेशक गृह रक्षक वाहिनी पुनीत रघु ने बताया कि होमगार्ड के पास सभी आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं और वे किसी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार हैं। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने एक्शन प्लान भी प्रस्तुत किए और मानसून के दौरान की जाने वाली तैयारियों पर चर्चा की।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि मंडी जिला प्रशासन आगामी मानसून को लेकर पूरी तरह सतर्क है। समय रहते की गई ये तैयारियां संभावित आपदाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।