HPU में फुले सत्र विवाद, छात्रों ने ABVP पर उठाए सवाल

rakesh nandan

24/04/2026

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में 23 अप्रैल 2026 को आयोजित एक शैक्षणिक सत्र को लेकर विवाद सामने आया है। लोक प्रशासन विभाग द्वारा आयोजित यह सत्र समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की जीवनी पर आधारित था। हालांकि, इस कार्यक्रम के बाद छात्र संगठन ABVP द्वारा विरोध जताया गया, जिससे मामला चर्चा में आ गया है।

जानकारी के अनुसार, सत्र के आयोजन के बाद ABVP के सदस्यों ने विभाग के अधिकारियों का घेराव किया और सोशल मीडिया के माध्यम से सत्र के बारे में आपत्तिजनक आरोप लगाए। संगठन का आरोप है कि सत्र के दौरान हिंदू धर्म की धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया।

वहीं, इस विवाद के बीच लोक प्रशासन विभाग के छात्रों ने सामने आकर इन आरोपों का विरोध किया है। छात्रों ने डीन ऑफ स्टडीज को एक ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि सत्र के बारे में फैलाए जा रहे आरोप भ्रामक और निराधार हैं। उनका कहना है कि वे स्वयं सत्र के दौरान उपस्थित थे और पूरे कार्यक्रम को प्रत्यक्ष रूप से देखा है।

छात्रों के अनुसार, यह सत्र अकादमिक रूप से समृद्ध, बौद्धिक रूप से प्रेरक और खुली चर्चा के वातावरण में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि सत्र का उद्देश्य केवल ज्योतिबा फुले के जीवन और उनके सामाजिक योगदानों पर विचार-विमर्श करना था, न कि किसी धार्मिक भावना को आहत करना।

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि सत्र के बारे में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया वर्गों में जो जानकारी प्रसारित की जा रही है, वह तथ्यों का जानबूझकर गलत चित्रण है। उनका मानना है कि यह विवाद अनावश्यक रूप से पैदा किया गया है और इसका उद्देश्य शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करना है।

ज्ञापन में छात्रों ने कहा कि इस प्रकार की गलत बयानी उच्च शिक्षा के मूल मूल्यों के खिलाफ है। विश्वविद्यालय ऐसे स्थान होते हैं जहां स्वतंत्र विचार, बहस और खुली चर्चा को प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने कहा कि बाहरी दबाव और गलत प्रचार के माध्यम से अकादमिक चर्चाओं को बाधित करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह अकादमिक स्वतंत्रता के लिए खतरा भी है।

छात्रों ने ABVP के खिलाफ कड़ा विरोध जताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि झूठी अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अकादमिक संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है और इसे रोकना जरूरी है।

इसके साथ ही छात्रों ने प्रशासन को यह भी सलाह दी कि वह किसी भी प्रकार के असत्यापित दावों के आधार पर जल्दबाजी में कोई निर्णय न ले। उनका कहना है कि इस प्रकार के मामलों में संतुलित और तथ्यों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, ताकि विश्वविद्यालय की गरिमा और स्वायत्तता बनी रहे।

छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे तर्कसंगत संवाद, संवैधानिक मूल्यों और अकादमिक स्वतंत्रता के पक्ष में खड़े हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सच्चाई को सामने लाया जाए और इस तरह के विवादों को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में विश्वविद्यालयों में अकादमिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस जारी है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और किस प्रकार से इस विवाद का समाधान किया जाता है।