हमीरपुर में ‘खेत बचाओ’ अभियान के तहत 250 किसानों को प्रशिक्षण

rakesh nandan

05/06/2026

‘खेत बचाओ’ अभियान के तहत हमीरपुर में 250 किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण

हमीरपुर। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) बड़ू और कृषि विभाग की आतमा परियोजना हमीरपुर द्वारा ग्राम पंचायत रैल के गांव रैल और कमलाहू में ‘खेत बचाओ’ अभियान के अंतर्गत प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में लगभग 250 किसानों ने भाग लेकर वैज्ञानिक खेती, पोषण प्रबंधन, पौध संरक्षण और प्राकृतिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि ‘खेत बचाओ’ अभियान का उद्देश्य किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान करना है। अभियान के माध्यम से किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती की लागत कम करने के उपायों से अवगत कराया जा रहा है।

यह राष्ट्रीय स्तर का अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे देश में चलाया जा रहा है। इसके तहत कृषि वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों को खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। अभियान का मुख्य फोकस खेतों में संतुलित पोषण प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती पद्धतियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर है।

प्रशिक्षण शिविरों के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र बड़ू के प्रभारी डॉ. विशाल डोगरा ने किसानों को ‘खेत बचाओ’ अभियान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम और मिट्टी की घटती गुणवत्ता को देखते हुए वैज्ञानिक खेती अपनाना समय की आवश्यकता बन गया है। उन्होंने किसानों से खेती में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कृषि कार्य करने का आग्रह किया।

मृदा विशेषज्ञ डॉ. नवनीत जरियाल ने किसानों को खरीफ मौसम में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि फसल की अच्छी पैदावार के लिए बुवाई के समय उचित पोषण प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों को मिट्टी परीक्षण करवाने और उसी के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी।

डॉ. जरियाल ने कहा कि संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों का प्रयोग न केवल उत्पादन बढ़ाता है बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी लंबे समय तक बनाए रखने में सहायक होता है। उन्होंने किसानों को जैविक और प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त पोषक तत्वों के उपयोग पर भी बल दिया।

कीट वैज्ञानिक डॉ. छवि ने किसानों को पौध संरक्षण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने खरीफ फसलों में लगने वाले विभिन्न कीटों और रोगों की पहचान तथा उनके नियंत्रण के उपायों के बारे में विस्तार से बताया। विशेष रूप से उन्होंने मक्के की फसल में नुकसान पहुंचाने वाले फॉल आर्मी वर्म कीट के बारे में किसानों को जागरूक किया।

उन्होंने बताया कि फॉल आर्मी वर्म समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो यह मक्के की फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा उन्होंने फलों और सब्जियों में लगने वाली मक्खियों और अन्य हानिकारक कीटों के नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय भी बताए। किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (IPM) तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई।

आतमा परियोजना हमीरपुर के निदेशक डॉ. राकेश धीमान ने किसानों को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बनकर उभर रही है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करके खेती की लागत घटाई जा सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।

डॉ. धीमान ने किसानों से प्राकृतिक खेती के विभिन्न मॉडलों को अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित कृषि उत्पादों की बाजार में मांग भी लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

उपनिदेशक कृषि राजेश कुमार ने किसानों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिनका लाभ लेकर किसान अपनी कृषि गतिविधियों को और अधिक लाभदायक बना सकते हैं।

प्रशिक्षण शिविरों में किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। किसानों ने वैज्ञानिकों द्वारा दी गई जानकारी को उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को खरीफ फसलों की बेहतर खेती, पोषण प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, कीट नियंत्रण और सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।