हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने विश्वविद्यालय की गोपनीयता व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने आरोप लगाया है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है, जिससे छात्रों के भविष्य पर सीधा असर पड़ सकता है।
एसएफआई द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हाल ही में संजौली महाविद्यालय से सामने आई तस्वीरों ने स्थिति को उजागर किया है। संगठन का दावा है कि महाविद्यालय में चल रही वार्षिक परीक्षाओं के दौरान छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को अत्यंत लापरवाही से संभाला जा रहा है।
संगठन ने आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं को उन बसों में ले जाया जा रहा है, जिनका उपयोग सामान्य रूप से छात्र परिवहन के लिए किया जाता है। पहले यह कार्य विशेष ‘सिक्रेसी बस’ के माध्यम से किया जाता था, ताकि उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके। लेकिन अब इस प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिल रहा है, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।
एसएफआई ने यह भी दावा किया कि संजौली बायपास रोड पर उत्तर पुस्तिकाओं को लावारिस वस्तु की तरह रखा गया था। यदि यह आरोप सही है, तो यह परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। संगठन का कहना है कि इस तरह की लापरवाही सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
संगठन ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय के पास उत्तर पुस्तिकाओं के सुरक्षित परिवहन के लिए केवल एक सिक्रेसी बस उपलब्ध है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन नई बस खरीदने या व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। इसके कारण उत्तर पुस्तिकाओं के परिवहन में वैकल्पिक और कम सुरक्षित साधनों का उपयोग किया जा रहा है।
इसके अलावा, एसएफआई ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाओं के जांच केंद्रों का चयन भी महाविद्यालय स्तर पर किया जा रहा है, जबकि पहले इन्हें राज्य के बाहर के विश्वविद्यालयों में जांच के लिए भेजा जाता था। इस बदलाव से मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी संदेह उत्पन्न हो रहा है।
एसएफआई ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की गोपनीयता व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे और गोपनीयता से जुड़े सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू करे।
संगठन ने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस स्थिति को नहीं सुधारा गया, तो इससे छात्रों के परिणामों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है, जिससे उनके करियर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
अंत में, एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि उत्तर पुस्तिकाओं के परिवहन और मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और गोपनीय बनाया जाए। साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
यह मामला अब शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।