दूध MSP से पशुपालकों को मिली आर्थिक मजबूती

rakesh nandan

20/04/2026

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादकों के हित में उठाया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारण का निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया है। इस पहल से किसानों और पशुपालकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे उनकी आय में स्थिरता और वृद्धि सुनिश्चित हो रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला सहारा

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन एक प्रमुख आजीविका का साधन है। ऐसे में दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने से किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव और मोल-भाव की अनिश्चितता से राहत मिली है। अब उन्हें अपने उत्पाद का तय मूल्य मिल रहा है, जिससे आर्थिक सुरक्षा की भावना भी मजबूत हुई है।

इस निर्णय का असर यह भी हुआ है कि अधिक लोग पशुपालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे न केवल व्यक्तिगत आय बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ हो रही है।

बिलासपुर के पशुपालकों को बड़ा लाभ

बिलासपुर जिले के पशुपालक इस योजना से विशेष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। स्थानीय किसान किशन लाल, जो चंगर क्षेत्र के निवासी हैं, बताते हैं कि उन्होंने दो भैंसें पाल रखी हैं और प्रतिदिन 4 से 5 लीटर दूध बेचते हैं। उनका कहना है कि अब उन्हें दूध के अच्छे दाम मिल रहे हैं और उनकी आय में सुधार हुआ है। उन्होंने इस पहल के लिए प्रदेश सरकार का आभार भी व्यक्त किया। इसी प्रकार लखनपुर की निवासी पानो देवी, जो गाय और भैंस दोनों का पालन करती हैं, बताती हैं कि उन्हें घर से ही दूध बेचने पर बेहतर मूल्य मिल रहा है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। जुखाला क्षेत्र के धमथल गांव की रीना देवी भी इस योजना से संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि पहले दूध के दाम को लेकर असमंजस रहता था, लेकिन अब एमएसपी तय होने से उन्हें स्थिर आय मिल रही है।

पशुपालकों के लिए आर्थिक संबल

जिले के अन्य पशुपालकों का भी मानना है कि दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण उनके लिए आर्थिक संबल साबित हो रहा है। समय-समय पर इसमें की जा रही वृद्धि से उनकी आय में निरंतर सुधार हो रहा है। इससे पशुपालन व्यवसाय को भी प्रोत्साहन मिल रहा है और लोग इसे स्थायी आय के स्रोत के रूप में अपनाने लगे हैं।

उत्पादन और योजनाओं का असर

उप-निदेशक पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन डॉ. किशोरी लाल शर्मा के अनुसार, जिले में लगभग 7,490 किसान प्रतिदिन 30,446 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। इस उत्पादन में स्थानीय दुग्ध समितियों और सहकारी संस्थाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा फ्रेट सब्सिडी योजना के तहत किसानों को 3 रुपये प्रति लीटर की सहायता और अतिरिक्त 3 रुपये प्रति लीटर का इंसेंटिव दिया जा रहा है। इससे दुग्ध उत्पादन को और बढ़ावा मिल रहा है।

प्रशासन की भूमिका

उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जा रहा है, ताकि पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध तरीके से लाभ पहुंच सके। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि योजनाओं का अधिकतम लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो।