हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से 15 जून 2026 को राज्यव्यापी मेगा मॉक अभ्यास का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह अभ्यास भूकंप, बादल फटने और जंगल की आग जैसी संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों का व्यापक परीक्षण करेगा।
इस संबंध में एक राज्य स्तरीय मार्गदर्शन एवं समन्वय कार्यशाला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न जिलों के उपायुक्तों, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, पुलिस अधिकारियों और अन्य विभागीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य आगामी मेगा मॉक ड्रिल की रूपरेखा, प्रक्रियाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना था।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से मेजर जनरल सुधीर बहल (सेवानिवृत्त) ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए मॉक अभ्यास के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह राज्यव्यापी अभ्यास आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा।
15 जून को आयोजित होने वाली इस मेगा मॉक एक्सरसाइज में हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों के जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, विभिन्न सरकारी विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और अन्य केंद्रीय एजेंसियां भाग लेंगी।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण शाम 6 बजे से रात 9:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न प्रकार की आपदा परिस्थितियों का कृत्रिम सृजन कर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया जाएगा।
मॉक ड्रिल के दौरान विशेष रूप से तीन प्रमुख आपदाओं—भूकंप, बादल फटने से उत्पन्न बाढ़ और जंगल की आग—पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इन आपदाओं से निपटने के लिए तैयार की गई मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की प्रभावशीलता का परीक्षण किया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि विभिन्न विभाग और एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ कितनी तेजी और दक्षता से कार्य कर सकती हैं।
कार्यक्रम से पहले 12 जून को टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। इस अभ्यास के दौरान जिला प्रशासन अपनी जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं, नागरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं और भूकंप प्रतिक्रिया योजनाओं की प्रस्तुति देगा। इससे विभिन्न विभागों को अपनी तैयारियों की समीक्षा करने और आवश्यक सुधार करने का अवसर मिलेगा।
एनडीएमए ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे बनावटी आपदा स्थलों की पहचान और उनकी तैयारी समय पर पूरी करें। इन स्थलों पर आपदा जैसी परिस्थितियां उत्पन्न कर राहत और बचाव कार्यों का अभ्यास कराया जाएगा। इससे वास्तविक आपदा के समय सामने आने वाली चुनौतियों को समझने और उनका समाधान खोजने में मदद मिलेगी।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और आईटीबीपी जैसी एजेंसियां उपायुक्तों के समन्वय से निर्धारित स्थलों पर सिमुलेशन तैयार करेंगी। प्रत्येक सिमुलेशन स्थल पर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जो अभ्यास के दौरान विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन करेंगे और अपनी रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरणों को सौंपेंगे।
कार्यशाला के दौरान उपायुक्त अपूर्व देवगन ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आपदा के समय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों की होती है, इसलिए उनकी तैयारी और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उपायुक्त ने कहा कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपनी भूमिका एवं जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए। आपदा की स्थिति में समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया ही जन-धन की हानि को कम करने में मदद करती है। इसलिए इस पूर्वाभ्यास को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ आयोजित किया जाना आवश्यक है।
राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास करना नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन तंत्र की वास्तविक क्षमता का आकलन करना भी है। इससे भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।