सिरमौर जिला के तारुवाला क्षेत्र की शिव कॉलोनी (वार्ड नंबर 13 ए, बी और सी) में रहने वाले करीब 400 से अधिक परिवार पिछले लंबे समय से गंदे पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार यह समस्या अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है और स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि तारुवाला के प्रमुख चौराहे पर स्थित पीने के पानी की नहर को अवैध कब्जाधारियों द्वारा बंद कर दिया गया है। इसके चलते नहर का प्राकृतिक बहाव रुक गया है। इसके अलावा पंचायत क्षेत्र के कुछ लोगों द्वारा अपने घरों और शौचालयों का गंदा पानी भी इसी नहर में छोड़ा जा रहा है, जिससे स्थिति और भी बदतर हो गई है।
नहर बंद होने के कारण गंदा पानी ओवरफ्लो होकर ढलान के चलते सीधे शिव कॉलोनी के घरों में घुस रहा है। लोगों का कहना है कि उन्हें अपने घरों में बदबू और गंदगी के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को इस क्षेत्र से गुजरते समय मुंह पर मास्क लगाना पड़ता है। मच्छरों और मक्खियों की बढ़ती संख्या के कारण बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय निवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे नियमित रूप से हाउस टैक्स और अन्य सभी करों का भुगतान करते हैं, इसके बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार “स्वच्छ भारत अभियान” की बात करती है, तो इस तरह की समस्याओं पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा।
यह समस्या केवल स्थानीय निवासियों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूली बच्चों के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। तारुवाला का यह क्षेत्र एक प्रमुख चौराहा है, जहां से स्कूल बसें बच्चों को लेने और छोड़ने आती हैं। कई बार बच्चे इस गंदे पानी में गिर चुके हैं। अभिभावकों को मजबूरी में बच्चों के जूते और मोजे उतारकर उन्हें स्कूल तक पहुंचाना पड़ता है, ताकि उनके कपड़े गंदे न हों।

इस समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे आगामी चुनावों का बहिष्कार करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रशासन ने उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया, तो वे सड़क जाम करने जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
मौके पर पहुंचे समाजसेवी नाथूराम चौहान ने स्थिति का निरीक्षण करते हुए कहा कि हालात बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने बताया कि नहर में जमा गंदा पानी इतना खतरनाक हो चुका है कि यदि कोई बच्चा उसमें गिर जाए तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गंदगी और बदबू के कारण गंभीर बीमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है।
नाथूराम चौहान ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि इस समस्या का तुरंत समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का काम जनता को सुविधाएं देना है, न कि उन्हें परेशानियों में डालना। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता की समस्याओं के समय उनके साथ नहीं खड़े होते, तो उन्हें जनता से वोट मांगने का अधिकार भी नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि नहर का बंद होना और उसके ऊपर अवैध निर्माण एक दिन में नहीं हुआ होगा, बल्कि यह लंबे समय से चल रहा है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, जो चिंता का विषय है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए और उन्हें इस नारकीय स्थिति से राहत दिलाई जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर भी लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घरों में उचित सीवेज प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करें।
अंततः, यह समस्या केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और नागरिक जिम्मेदारी दोनों का परिणाम है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।