हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू उपमंडल के कुलगांव में धार्मिक आयोजन के दौरान हुई फायरिंग की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने इस घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताया है।
राकेश जमवाल ने मृतका रितिका (उर्फ गुड़िया) के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं और इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान हर्ष फायरिंग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार इन्हें रोकने में विफल रही है। उन्होंने कहा, “यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि प्रदेश में कानून का भय खत्म हो चुका है और प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है।”
राकेश जमवाल ने कहा कि यदि प्रशासन और पुलिस समय रहते सतर्क होती, तो इस तरह की दुखद घटना को रोका जा सकता था। उन्होंने सवाल उठाया कि सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन और फायरिंग कैसे हो सकती है, यह प्रशासन की गंभीर चूक को दर्शाता है।
उन्होंने रोहड़ू अस्पताल में शव को ले जाने की व्यवस्था को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कथित रूप से रेत से भरे वाहन में शव ले जाने की कोशिश की गई, वह प्रशासन की असंवेदनशीलता का उदाहरण है। उन्होंने इसे “मानवता को शर्मसार करने वाली घटना” करार दिया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पीड़ित परिवार का आक्रोश पूरी तरह जायज है और सरकार को इस मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस मामले में सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।
राकेश जमवाल ने इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है, जो कि एक गंभीर स्थिति है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए और प्रशासनिक तंत्र को अधिक सक्रिय बनाए।
इस घटना ने प्रदेश में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह भी जरूरी है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने आए, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
अंततः, यह मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर परीक्षा है। आने वाले समय में सरकार और प्रशासन इस चुनौती का किस तरह सामना करते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।