हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज किन्नौर जिले के टापरी में स्थापित विश्व की पहली भू-तापीय ऊर्जा संचालित सेब कोल्ड स्टोरेज एवं फल सुखाने की संयुक्त इकाई का निरीक्षण किया। यह अत्याधुनिक सुविधा प्रदेश के कृषि और बागवानी क्षेत्र में नवाचार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।
यह इकाई 1,000 टन क्षमता की है और इसे हिमाचल प्रदेश विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (HPMC) तथा आइसलैंड की एक कंपनी के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत विकसित किया गया है। यह परियोजना तकनीकी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान इस इकाई में कुल 16,963 किलोग्राम फलों का प्रसंस्करण किया गया है। इनमें से 5,105 किलोग्राम फल नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच, जबकि 11,948 किलोग्राम फल जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच संसाधित किए गए।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह सुविधा स्थानीय किसानों और बागवानों के लिए और अधिक लाभकारी सिद्ध होगी। इससे न केवल फलों के संरक्षण में सुधार होगा, बल्कि किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी।
इस परियोजना की सबसे खास विशेषता यह है कि इसमें फलों के भंडारण और सुखाने के लिए भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। पारंपरिक कोल्ड स्टोरेज सिस्टम जहां बिजली पर निर्भर होते हैं, वहीं यह इकाई प्राकृतिक ऊष्मा स्रोतों का उपयोग कर ऊर्जा की बचत करती है और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है।
किन्नौर का यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से गर्म जलस्रोतों के लिए जाना जाता है, जिनका उपयोग इस परियोजना में कुशलतापूर्वक किया जा रहा है। इस प्रकार यह इकाई न केवल तकनीकी दृष्टि से उन्नत है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को भी बढ़ावा देती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि और बागवानी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस परियोजना के लाभों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए और उन्हें इस तकनीक के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा तथा पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की परियोजनाएं भविष्य में हिमाचल प्रदेश को एक सतत और पर्यावरण अनुकूल कृषि मॉडल के रूप में स्थापित करने में सहायक होंगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, टापरी में स्थापित यह भू-तापीय ऊर्जा आधारित कोल्ड स्टोरेज और फल सुखाने की इकाई न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश को हरित और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम भी है।