नारी शक्ति बिल पर सांसद कश्यप का कांग्रेस पर हमला

rakesh nandan

22/04/2026

Suresh Kashyap ने नाहन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से जुड़े घटनाक्रम के बाद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का जश्न मनाना उनकी कथित “महिला विरोधी मानसिकता” को दर्शाता है।

Suresh Kashyap ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें चुनावों में बराबर की भागीदारी देने के उद्देश्य से नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रस्तुत किया था। उनके अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना था।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल नहीं चाहते कि महिलाएं राजनीति में आगे बढ़ें और संसद में उनकी भागीदारी बढ़े। इसी मानसिकता के चलते उन्होंने इस विधेयक का विरोध किया और इसे गिराने का काम किया। कश्यप ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर देशभर की महिलाओं में आक्रोश है और इसका असर आने वाले चुनावों में दिखाई देगा।

Suresh Kashyap ने कहा कि देश की लगभग 50 प्रतिशत महिला आबादी इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और वे इस प्रकार के कदमों को नजरअंदाज नहीं करेंगी। उनके अनुसार, यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा विषय है।

इसी मुद्दे पर Daisy Thakur ने भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को गिराकर कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ कदम उठाया है।

Daisy Thakur ने कहा कि जिस विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें राजनीतिक भागीदारी में समान अवसर देना था, उसका विरोध करना सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस बिल को गिराकर महिलाओं के अधिकारों पर “डाका” डाला है।

उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में महिलाएं इस मुद्दे को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रही हैं और आने वाले समय में इसका राजनीतिक प्रभाव देखने को मिलेगा। उनके अनुसार, महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और वे इस प्रकार के निर्णयों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे मुद्दे चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर समाज के एक बड़े वर्ग से जुड़ा होता है। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दल इस विषय पर अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।

हालांकि, इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है, जिससे चुनावी माहौल और अधिक सक्रिय हो गया है। विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जो आने वाले समय में और तेज हो सकता है।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश और प्रदेश की राजनीति में एक नया विमर्श शुरू हो गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे का राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है और जनता किस पक्ष का समर्थन करती है।