हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में आधार सेवाओं को सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय आधार निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एल.आर. वर्मा ने उपायुक्त कार्यालय सभागार में की। बैठक में आधार नामांकन, बायोमैट्रिक अपडेट और विभिन्न आयु वर्ग के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एल.आर. वर्मा ने कहा कि 0 से 5 वर्ष के बच्चों का आधार कार्ड बनवाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 5 वर्ष और 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों के लिए बायोमैट्रिक अपडेट करवाना अनिवार्य है। यदि यह अपडेट समय पर नहीं करवाया गया, तो संबंधित आधार कार्ड निष्क्रिय भी हो सकता है, जिससे भविष्य में कई सेवाओं में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
उन्होंने बताया कि 5 से 7 वर्ष और 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए आधार एनरोलमेंट और बायोमैट्रिक अपडेट निशुल्क किया जाता है। यह सुविधा अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिससे वे अपने बच्चों के दस्तावेज समय रहते अपडेट करवा सकते हैं।
बैठक में यह भी बताया गया कि आज के समय में आधार की आवश्यकता लगभग हर महत्वपूर्ण प्रक्रिया में होती है। प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रियाओं जैसे National Testing Agency (NTA), NEET, JEE, UPSC और CUET में आवेदन के दौरान आधार प्रमाणीकरण जरूरी होता है। यदि उम्मीदवार ने अपने आधार में बायोमैट्रिक अपडेट या मोबाइल नंबर अपडेट नहीं किया है, तो प्रमाणीकरण विफल हो सकता है, जिससे आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने जिले के सभी उपमंडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे 18 वर्ष से अधिक आयु के निवासियों के आधार नामांकन और सत्यापन को 45 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। उन्होंने शिक्षा विभाग को भी निर्देशित किया कि स्कूलों में लगाए जाने वाले आधार शिविरों का समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाए, ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके।
स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए एल.आर. वर्मा ने कहा कि वैक्सीनेशन सेंटरों पर 0 से 5 वर्ष के बच्चों का आधार पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए अतिरिक्त आधार सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से सभी वैक्सीनेशन केंद्रों की सूची प्रशासन को उपलब्ध कराने को भी कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति 10 वर्षों से एक ही स्थान पर रह रहे हैं, उन्हें भी अपने आधार दस्तावेज अपडेट करवाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या न आए। इसके साथ ही किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसका आधार डी-एक्टिवेट करवाना जरूरी है, जिससे उसका दुरुपयोग रोका जा सके।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि दिव्यांग और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों के लिए घर-द्वार पर ही आधार सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे ऐसे लोगों को बड़ी राहत मिल रही है, जो केंद्रों तक पहुंचने में असमर्थ हैं।
यूआईडीएआई से आए सहायक प्रबंधक अभिषेक कुमार ने यूडीआईएसई पोर्टल और आधार नामांकन से संबंधित नए दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चाइल्ड केयर सेंटर और आश्रय गृहों में रहने वाले बच्चों और जरूरतमंद व्यक्तियों के आधार नामांकन को सरल बनाने के लिए विशेष एसओपी जारी की गई है, जिसके तहत आवश्यक दस्तावेजों को मान्य पहचान और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
बैठक में ई-जिला प्रबंधक शिखा शर्मा ने विभिन्न बिंदुओं पर प्रस्तुति दी, जिस पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, बीएसएनएल, कल्याण विभाग और बाल विकास विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
अंततः, इस बैठक के माध्यम से प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि आधार केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए आवश्यक सेवाओं और योजनाओं का प्रवेश द्वार है। इसलिए समय पर आधार नामांकन और अपडेट करवाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।