शिमला ग्रीष्मोत्सव में नशा मुक्ति पर होगी महानाटी

rakesh nandan

03/06/2026

अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 के अंतर्गत समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक विशेष थीम आधारित महानाटी का आयोजन किया जाएगा। ‘MAA (Mothers Against Abuse and Addiction)’ विषय पर आधारित यह कार्यक्रम 9 जून 2026 को दोपहर 3 बजे से सायं 5 बजे तक पुलिस सहायता कक्ष के समीप आयोजित होगा।

इस आयोजन में शिमला जिले के विभिन्न आईसीडीएस खंडों से लगभग 250 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं भाग लेंगी। कार्यक्रम का उद्देश्य मातृ शक्ति को समाज में सकारात्मक परिवर्तन की अग्रदूत के रूप में स्थापित करना तथा नशा मुक्त समाज निर्माण के लिए उनकी भूमिका को मजबूत करना है।

उपायुक्त शिमला एवं अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव समिति के अध्यक्ष अनुपम कश्यप ने बताया कि इस अभियान का मुख्य संदेश “मां की ममता, समाज की शक्ति” है। इस संदेश के माध्यम से माताओं को यह प्रेरणा दी जाएगी कि वे अपने परिवार और समाज को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि आज के समय में नशा समाज के सामने एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। इसका सबसे अधिक प्रभाव युवाओं और परिवारों पर पड़ता है। ऐसे में माताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि परिवार में बच्चों के संस्कारों और जीवन मूल्यों की पहली शिक्षा मां से ही शुरू होती है।

महानाटी के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि हर मां अपने परिवार को सुरक्षित, स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण प्रदान करने की जिम्मेदारी निभा सकती है। कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, पारिवारिक मूल्यों की मजबूती तथा सामाजिक जागरूकता को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम के दौरान नशा विरोधी संदेशों को सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से लोगों तक पहुंचाया जाएगा। महानाटी में भाग लेने वाली महिलाएं सामूहिक रूप से यह संकल्प लेंगी कि वे नशे और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएंगी तथा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देंगी।

इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना भी है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि सशक्त महिलाएं ही सुरक्षित परिवार और मजबूत समाज की नींव रख सकती हैं। जब माताएं जागरूक होंगी, तभी बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित और उज्ज्वल बन सकेगा।

महानाटी के दौरान “सशक्त मां, सुरक्षित बचपन, नशामुक्त समाज और उज्ज्वल भविष्य” की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

जिला प्रशासन शिमला और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति ही नहीं होगी, बल्कि आम लोगों को महत्वपूर्ण हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी जाएगी। इस दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और महिला हेल्पलाइन 181 के बारे में जागरूकता फैलाने पर विशेष जोर रहेगा।

अधिकारियों का मानना है कि कई बार जरूरतमंद लोग इन हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी के अभाव में सहायता प्राप्त नहीं कर पाते। ऐसे कार्यक्रम लोगों को उपलब्ध सरकारी सेवाओं और सहायता तंत्र से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं ग्रामीण तथा शहरी समुदायों में महिलाओं और बच्चों के बीच लगातार कार्य करती हैं। ऐसे में उनके माध्यम से नशा मुक्ति और सामाजिक जागरूकता का संदेश अधिक प्रभावी ढंग से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच सकता है।

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने जिला के सभी नागरिकों से इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त और सुरक्षित समाज का निर्माण केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामूहिक सामाजिक भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव के मंच से दिया जाने वाला यह संदेश समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और युवाओं को नशे से दूर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।