मंडी में ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान शुरू

rakesh nandan

03/06/2026

न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा “मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 अभियान” चलाया जा रहा है। मंडी जिला में भी इस अभियान को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक विवादों का निपटारा आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से किया जा सके।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) मंडी विवेक कायस्थ ने बताया कि यह अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशन तथा मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC) के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों को आपसी समझ, सहमति और संवाद के जरिए सुलझाना है।

उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। ऐसे मामलों में कई बार वर्षों तक सुनवाई चलती रहती है, जिससे संबंधित पक्षों को समय, धन और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। मध्यस्थता की प्रक्रिया ऐसे मामलों के समाधान का एक प्रभावी और व्यावहारिक विकल्प प्रदान करती है।

विवेक कायस्थ ने बताया कि इस अभियान के तहत विवाह एवं पारिवारिक विवादों, मोटर वाहन दुर्घटना दावा मामलों, घरेलू हिंसा से संबंधित मामलों, चेक बाउंस प्रकरणों, वाणिज्यिक विवादों, सेवा संबंधी मामलों, श्रम विवादों, उपभोक्ता मामलों तथा भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों का समाधान मध्यस्थता के माध्यम से किया जा सकता है।

इसके अलावा ऐसे अन्य दीवानी और आपराधिक मामले, जिनमें कानूनन समझौते की अनुमति है, उन्हें भी इस प्रक्रिया के तहत निपटाया जा सकता है। इससे अदालतों का कार्यभार कम होने के साथ-साथ संबंधित पक्षों को भी शीघ्र न्याय प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

उन्होंने बताया कि मध्यस्थता एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रिया (Alternative Dispute Resolution) है, जिसमें विवाद से जुड़े दोनों पक्ष एक प्रशिक्षित और निष्पक्ष मध्यस्थ की सहायता से बातचीत करते हैं। मध्यस्थ किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं करता बल्कि दोनों पक्षों को आपसी सहमति तक पहुंचने में मदद करता है।

मध्यस्थता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह गोपनीय प्रक्रिया होती है। इसमें पक्षकार खुलकर अपनी बात रख सकते हैं और समाधान खोजने के लिए सकारात्मक संवाद कर सकते हैं। न्यायालयी प्रक्रिया की तुलना में यह अपेक्षाकृत सरल, कम खर्चीली और कम समय लेने वाली होती है।

विवेक कायस्थ ने कहा कि कई मामलों में न्यायालय का फैसला किसी एक पक्ष के पक्ष में जाता है, जिससे दूसरे पक्ष में असंतोष रह सकता है। जबकि मध्यस्थता के माध्यम से निकला समाधान दोनों पक्षों की सहमति से तैयार होता है, इसलिए इसे अधिक स्वीकार्यता मिलती है और आपसी संबंध भी बने रहते हैं।

विशेष रूप से पारिवारिक विवादों, वैवाहिक मामलों और पड़ोसियों या व्यवसायिक साझेदारों के बीच उत्पन्न विवादों में मध्यस्थता बेहद प्रभावी साबित होती है। इससे रिश्तों में कड़वाहट कम होती है और भविष्य में सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में सहायता मिलती है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मंडी द्वारा लोगों को इस अभियान के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न स्तरों पर जानकारी दी जा रही है। लोगों को बताया जा रहा है कि यदि उनका कोई मामला न्यायालय में लंबित है और वह समझौता योग्य श्रेणी में आता है, तो वे मध्यस्थता का विकल्प चुन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि न्याय प्राप्ति का उद्देश्य केवल निर्णय प्राप्त करना नहीं बल्कि विवाद का स्थायी और संतोषजनक समाधान भी होना चाहिए। मध्यस्थता इसी सोच को आगे बढ़ाने का कार्य करती है और न्याय प्रणाली को अधिक मानवीय एवं प्रभावी बनाती है।

सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जनसाधारण से अपील की कि वे इस अभियान का अधिकतम लाभ उठाएं और अपने लंबित विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया को अपनाएं। उन्होंने कहा कि यह न केवल समय और धन की बचत करेगा, बल्कि समाज में सौहार्द और आपसी विश्वास को भी मजबूत बनाएगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि “मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 अभियान” न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और लोगों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।