शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 में दिखेगी हिमाचल की लोक संस्कृति की रंगत, 200 कलाकार करेंगे प्रस्तुति
शिमला। अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 के दौरान हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक कला का भव्य प्रदर्शन देखने को मिलेगा। 8 जून से 12 जून 2026 तक आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित उत्सव में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग 200 कलाकार अपनी कला और संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरेंगे।
ग्रीष्मोत्सव हर वर्ष प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनता है। इस वर्ष भी स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता देते हुए आयोजन समिति ने लोक कलाकारों, नृत्य दलों और वाद्य यंत्र वादकों को मंच प्रदान किया है।
स्थानीय कलाकारों को मिलेगा बड़ा मंच
उपायुक्त शिमला एवं अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष अनुपम कश्यप ने बताया कि उत्सव का मुख्य उद्देश्य हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाना और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली कलाकार मौजूद हैं, लेकिन उन्हें बड़े मंचों पर अपनी कला दिखाने के अवसर सीमित मिलते हैं। ग्रीष्मोत्सव ऐसे कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आता है, जहां वे हजारों दर्शकों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।
लोक संगीत और नृत्य से सजेगी हर शाम
ग्रीष्मोत्सव के दौरान प्रतिदिन हिमाचल प्रदेश के लोक गायक, लोक नर्तक, पारंपरिक वाद्य यंत्र वादक तथा विभिन्न सांस्कृतिक दल मंच पर प्रस्तुति देंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की विविध लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कलाओं को प्रदर्शित किया जाएगा।
आयोजन समिति का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम न केवल कलाकारों का उत्साह बढ़ाते हैं बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी कार्य करते हैं। लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में इस तरह के आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
अन्य राज्यों की संस्कृति की भी मिलेगी झलक
ग्रीष्मोत्सव में केवल हिमाचली संस्कृति ही नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता भी देखने को मिलेगी। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NZCC) पटियाला के सहयोग से विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- छोलिया नृत्य (उत्तराखंड)
- भवई नृत्य (राजस्थान)
- गोजरी नृत्य (जम्मू एवं कश्मीर)
- घूमर नृत्य और फाग नृत्य (हरियाणा)
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को भारत की विविध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक रंगों का अनुभव करने का अवसर मिलेगा।
बॉबी सिद्धू की प्रस्तुति रहेगी विशेष आकर्षण
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विशेष आकर्षण के रूप में 10 जून को प्रसिद्ध पंजाबी गायक Bobby Sidhu अपनी प्रस्तुति देंगे। अपने लोकप्रिय गीतों और मंचीय प्रस्तुतियों के लिए जाने जाने वाले बॉबी सिद्धू के कार्यक्रम को लेकर युवाओं और संगीत प्रेमियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
संस्कृति और एकता का उत्सव
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव केवल मनोरंजन का मंच नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक एकता, लोक परंपराओं के संरक्षण और कलाकारों के सम्मान का भी महत्वपूर्ण आयोजन है। स्थानीय और बाहरी कलाकारों की प्रस्तुतियों का यह संगम हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान देने में सहायक सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि आयोजन समिति का प्रयास है कि ग्रीष्मोत्सव में आने वाले पर्यटक हिमाचल की समृद्ध संस्कृति, लोक कला और परंपराओं से परिचित हो सकें तथा प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को और अधिक व्यापक पहचान मिले।