उहल नदी में महाशीर मछली के 5 हजार बीज छोड़े गए, जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
मंडी। मत्स्य विभाग ने मंडी जिले में जैव विविधता संरक्षण और लुप्तप्राय मछली प्रजातियों के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कमांद स्थित आईआईटी कमांद पुल के निकट उहल नदी में महाशीर मछली के 5 हजार बड़े आकार के बीजों का संचयन किया है। इस पहल का उद्देश्य नदी तंत्र में महाशीर मछली की संख्या बढ़ाना तथा प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना है।
यह जानकारी देते हुए सहायक निदेशक मत्स्य, मत्स्य मंडल मंडी नीतू सिंह ने बताया कि यह संचयन पर्यावरण रक्षक मंच के अनुरोध पर किया गया। उन्होंने कहा कि नदी में छोड़े गए महाशीर मछली के बीज विभागीय महाशीर फार्म मच्छयाल में तैयार किए गए हैं।
लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण की दिशा में पहल
नीतू सिंह ने बताया कि महाशीर भारत की महत्वपूर्ण मीठे पानी की मछली प्रजातियों में से एक है, जिसे कई क्षेत्रों में लुप्तप्राय श्रेणी में माना जाता है। समय के साथ नदियों में प्राकृतिक आवासों के क्षरण, अवैध मत्स्य आखेट और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इसकी संख्या में कमी आई है।
उन्होंने कहा कि मंडी जिले की नदियों में महाशीर बीजों का संचयन न केवल इस प्रजाति के संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि नदी की जैव विविधता को भी मजबूत बनाएगा। इससे जल पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ
मत्स्य विभाग के अनुसार महाशीर मछली संरक्षण कार्यक्रम भविष्य में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ा सकता है। यदि नदी में महाशीर की संख्या बढ़ती है तो इससे नियंत्रित और सतत मत्स्य गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिसका लाभ स्थानीय समुदायों को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महाशीर जैसी प्रजातियां नदियों की पारिस्थितिक सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं। इनके संरक्षण से जल स्रोतों के दीर्घकालिक संरक्षण में भी सहायता मिलती है।
50 सेंटीमीटर से कम आकार की महाशीर पकड़ने पर रोक
मत्स्य विभाग ने महाशीर संरक्षण के लिए सख्त नियमों की जानकारी भी दी है। नीतू सिंह ने बताया कि 50 सेंटीमीटर या उससे कम आकार की महाशीर मछली को पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध लाइसेंसधारी मछुआरों पर भी समान रूप से लागू होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से महाशीर मछली का शिकार करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ मत्स्य विभाग द्वारा नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मछुआरों से सहयोग की अपील
मत्स्य विभाग ने स्थानीय मछुआरों और नदी किनारे रहने वाले लोगों से सहयोग की अपील की है। विभाग ने कहा कि महाशीर संरक्षण अभियान को सफल बनाने के लिए अवैध मत्स्य आखेट से बचना और नियमों का पालन करना आवश्यक है।
विभाग का मानना है कि सरकारी प्रयासों के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी से ही महाशीर जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियों का संरक्षण संभव है। इसी उद्देश्य से भविष्य में भी संरक्षण और संवर्धन से जुड़ी गतिविधियां जारी रखी जाएंगी।
उहल नदी में 5 हजार महाशीर बीजों का संचयन पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।