Bharatiya Janata Party Mahila Morcha द्वारा Chaura Maidan में आयोजित “जन आक्रोश महिला पदयात्रा” एक बड़े जनसैलाब में बदल गई, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई हजारों महिलाओं ने भाग लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। यह आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला अधिकारों, सम्मान और भागीदारी के मुद्दों को लेकर व्यापक संदेश देने वाला मंच बनकर सामने आया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता Daisy Thakur ने की। इस अवसर पर Rajeev Bindal, Shrikant Sharma, Jai Ram Thakur तथा Sanjay Tandon सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। पूरे चौड़ा मैदान में नारी शक्ति के नारों की गूंज सुनाई दी, जिससे कार्यक्रम का माहौल ऊर्जावान और उत्साहपूर्ण बना रहा।
भाजपा प्रदेश महामंत्री Payal Vaidya ने अपने संबोधन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं को पंचायत से लेकर संसद तक 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाई गई थी। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों ने इसे विवाद का विषय बना दिया।

वहीं Daisy Thakur ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर समाज और राजनीति में गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष Rashmi Dhar Sood ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नीतियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे व्यवहारिक रूप में लागू करना जरूरी है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा बताया।
इस दौरान विधायक Reena Kashyap ने भी अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है और इस दिशा में सकारात्मक प्रयास किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में Rajeev Bindal ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विभिन्न स्तरों पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
नेता प्रतिपक्ष Jai Ram Thakur ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी किसी भी समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
इस रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और महिला अधिकारों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने महिलाओं की भूमिका, अधिकारों और सामाजिक सहभागिता पर अपने विचार रखे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन समाज में जागरूकता बढ़ाने और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा को प्रोत्साहित करने में सहायक होते हैं। इससे महिलाओं की भागीदारी और जागरूकता दोनों में वृद्धि होती है।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि शिमला में आयोजित यह महिला पदयात्रा एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक संदेश के रूप में सामने आई है। इसमें महिलाओं की भारी भागीदारी यह दर्शाती है कि वे अपने अधिकारों और भागीदारी को लेकर सजग हैं और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।