तकनीकी गड़बड़ी से जीवित महिला पोर्टल में निष्क्रिय

rakesh nandan

23/04/2026

जिला बिलासपुर में सोशल मीडिया पर वायरल एक मामले को लेकर प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी Dr Shashi Dutt Sharma ने बताया कि पंचायत कचौली के गांव साई ब्राहमणा निवासी शीला देवी को सहारा योजना के ऑनलाइन पोर्टल में गलती से निष्क्रिय (Inactive) दिखाया जा रहा था।

Dr Shashi Dutt Sharma ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति किसी प्रशासनिक लापरवाही के कारण नहीं, बल्कि एक तकनीकी खराबी के कारण उत्पन्न हुई थी। उन्होंने कहा कि जैसे ही यह मामला संज्ञान में आया, संबंधित तकनीकी टीम द्वारा इसे तुरंत ठीक कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि अब 22 अप्रैल से पोर्टल में शीला देवी की स्थिति को सही कर दिया गया है और उन्हें जीवित (Active) के रूप में दर्शाया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि मामला केवल तकनीकी त्रुटि का था, जिसे समय रहते सुधार लिया गया।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं, जिनमें प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल भी उठाए गए। हालांकि, Dr Shashi Dutt Sharma ने इन सभी आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि विभाग पूरी तरह सतर्क है और ऐसी त्रुटियों को तुरंत सुधारने के लिए तत्पर रहता है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के कुछ अन्य मामले भी खंड चिकित्सा अधिकारियों के माध्यम से सामने आए हैं। इन मामलों में भी तकनीकी खामियों को दूर करने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही सभी को सही कर दिया जाएगा।

Dr Shashi Dutt Sharma ने सहारा योजना के लाभार्थियों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति को अपने रिकॉर्ड में कोई त्रुटि दिखाई देती है, तो वह तुरंत संबंधित खंड चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें।

उन्होंने कहा कि लाभार्थियों की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग लगातार काम कर रहा है। इस प्रकार की तकनीकी समस्याएं कभी-कभी सामने आ सकती हैं, लेकिन उन्हें समय रहते ठीक करना प्रशासन की प्राथमिकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल पोर्टल और ऑनलाइन योजनाओं के विस्तार के साथ इस प्रकार की तकनीकी चुनौतियां सामने आना असामान्य नहीं है। लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि संबंधित विभाग कितनी तेजी और जिम्मेदारी से इन समस्याओं का समाधान करता है।

यह मामला भी इसी बात का उदाहरण है कि प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए तकनीकी समस्या को तुरंत दूर किया और सही जानकारी अपडेट की।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि डिजिटल सिस्टम में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी और त्वरित सुधार बेहद आवश्यक है। जिला प्रशासन ने इस दिशा में सक्रियता दिखाते हुए एक संभावित भ्रम की स्थिति को स्पष्ट किया और लोगों का भरोसा बनाए रखा।