शिमला में गीता सत्संग, सुधांशु जी के प्रेरक विचार

rakesh nandan

16/04/2026

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में विश्व जागृति मिशन द्वारा आयोजित दिव्य गीता सत्संग कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, गणमान्य व्यक्तियों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस आध्यात्मिक आयोजन में उपस्थित सभी लोगों को परमपूज्य सुधांशु जी महाराज के प्रेरणादायक प्रवचनों को सुनने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। इस अवसर पर सुधांशु जी महाराज ने अपने संबोधन में जीवन को संतुलित, स्वस्थ और सकारात्मक बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने संतुलित और उत्तम आहार के महत्व को समझाते हुए कहा कि भोजन केवल शरीर को पोषण देने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे मन और विचारों को भी प्रभावित करता है। इसके साथ ही उन्होंने पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) को भी आवश्यक बताया और कहा कि नींद की कमी से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सुधांशु जी महाराज ने तनावमुक्त जीवन जीने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में अनावश्यक चिंताओं से दूर रहकर सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे नियमित दिनचर्या का पालन करें और प्रकृति के बीच समय बिताएं, जिससे मन को शांति और ऊर्जा मिलती है।

उन्होंने हृदय को स्वस्थ रखने और क्षमा भाव अपनाने का विशेष संदेश दिया। उनके अनुसार, क्षमा करने से व्यक्ति के मन का बोझ हल्का होता है और आंतरिक शांति प्राप्त होती है। यह गुण व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है और उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।

पारिवारिक जीवन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए स्वयं प्रयास करना चाहिए। उन्होंने घर में स्वच्छता और सुव्यवस्थित वातावरण को जरूरी बताते हुए कहा कि इससे मन प्रसन्न रहता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। उन्होंने धूप-दीप, भजन-कीर्तन और नाम जप के माध्यम से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की बात कही।

सुधांशु जी महाराज ने समाज सेवा को जीवन का एक महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर जरूरतमंदों, गरीबों और असहाय लोगों की सहायता करनी चाहिए। उनके अनुसार, सच्ची सेवा वही है जो बिना किसी स्वार्थ के की जाए। उन्होंने कहा कि सेवा भाव से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और यह उसे आध्यात्मिक रूप से भी समृद्ध बनाता है।

उन्होंने गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा योगी वही है, जो सभी प्राणियों में एक समान आत्मा का दर्शन करता है और सभी के प्रति समान भाव रखता है। उन्होंने सनातन जीवन दर्शन की महत्ता को रेखांकित करते हुए अहिंसा, करुणा और समदृष्टि को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस दिव्य सत्संग को अपने जीवन के लिए मार्गदर्शक बताया और विश्व जागृति मिशन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मकता और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देते हैं।

अंततः यह कहा जा सकता है कि इस गीता सत्संग ने लोगों को जीवन जीने की नई दिशा दी और उन्हें मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया।