उत्तर प्रदेश और हरियाणा में मजदूर आंदोलनों पर की गई कार्रवाई को लेकर ट्रेड यूनियन संगठन सीटू (CITU) ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन की जिला इकाई सिरमौर ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में मजदूरों पर कथित दमनात्मक कार्रवाई की निंदा की है।
संगठन का आरोप है कि मजदूरों के शांतिपूर्ण संघर्षों पर लाठीचार्ज, गिरफ्तारियां और झूठे मुकदमे थोपे जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सीटू के जिला महासचिव आशीष कुमार और अध्यक्ष राजेश तोमर ने संयुक्त बयान में कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
उन्होंने कहा कि देश में मजदूर वर्ग अपने वेतन, रोजगार की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की मांग कर रहा है, लेकिन सरकारें उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही हैं। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले मजदूरों को अपराधी की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
सीटू नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारें पूंजीपतियों के हितों की रक्षा में लगी हुई हैं, जबकि मजदूरों के अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की एकता को तोड़ने के लिए भय और दहशत का माहौल बनाया जा रहा है, ताकि उनके आंदोलनों को कमजोर किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि मजदूर वर्ग इन दमनकारी नीतियों के सामने झुकने वाला नहीं है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगा। संगठन का मानना है कि मजदूरों के मुद्दों को दबाने के बजाय सरकारों को उनके साथ संवाद करना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
सीटू जिला सिरमौर ने सरकार से मांग की है कि मजदूरों पर हो रहे दमन को तुरंत रोका जाए। साथ ही, गिरफ्तार किए गए सभी मजदूरों को बिना शर्त रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लिया जाए।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि मजदूरों की जायज मांगों को तुरंत स्वीकार किया जाना चाहिए। इसमें उचित वेतन, सुरक्षित कार्य परिस्थितियां और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये मांगें किसी भी श्रमिक के बुनियादी अधिकार हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सीटू ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकारें अपनी कथित मजदूर-विरोधी नीतियों से पीछे नहीं हटतीं, तो आंदोलन को और व्यापक और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
यह मामला केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में मजदूरों के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है। यदि इस तरह की घटनाएं जारी रहती हैं, तो इसका असर व्यापक स्तर पर पड़ेगा।
अंत में, सीटू ने सभी मजदूर संगठनों और आम जनता से अपील की है कि वे एकजुट होकर मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएं और इस संघर्ष को मजबूत करें।