Students Federation of India (एसएफआई) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने Himachal Pradesh University में फीस वृद्धि के फैसले का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्र विरोधी नीतियां अपनाने, संसाधनों के दुरुपयोग और कथित अवैध नियुक्तियों के गंभीर आरोप लगाए हैं।
एसएफआई ने कहा कि 28 मार्च 2026 को आयोजित ईसी (एक्जीक्यूटिव काउंसिल) की बैठक में फीस वृद्धि का जो निर्णय लिया गया, वह पूरी तरह छात्र विरोधी है। संगठन का कहना है कि आर्थिक कुप्रबंधन और अनावश्यक खर्चों का बोझ छात्रों पर डाला जा रहा है।
एसएफआई नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार शिक्षा को महंगा बना रहा है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना मुश्किल होता जा रहा है।
संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं। एसएफआई का आरोप है कि विश्वविद्यालय में यूजीसी नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रोफेसर (आईवीएस) पद पर कथित अवैध नियुक्तियां की गई हैं।
संगठन ने आईआईएचएस और डीआईएस में शिक्षण सेवाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। एसएफआई का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कुछ प्रोफेसरों की नियुक्ति और पदोन्नति नियमों के विरुद्ध की गई है।
संगठन के अनुसार इन नियुक्तियों और पदोन्नतियों के कारण विश्वविद्यालय के संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है और भारी आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है।
एसएफआई ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ईआरपी (ERP) सिस्टम पर हर वर्ष लगभग 18 से 20 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। संगठन का कहना है कि यह अत्यधिक खर्च है और विश्वविद्यालय को इसमें कटौती करनी चाहिए।
छात्र संगठन ने कहा कि जब विश्वविद्यालय पहले से आर्थिक संकट की बात कर रहा है, तब इस तरह के भारी खर्च और कथित अनियमितताएं सवाल खड़े करती हैं।
एसएफआई नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले अपने फिजूल खर्चों पर नियंत्रण करना चाहिए, बजाय इसके कि फीस बढ़ाकर छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जाए।
संगठन ने मांग की है कि विश्वविद्यालय में कथित अवैध नियुक्तियों और पदोन्नतियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए।
एसएफआई ने यह भी मांग की कि जिन लोगों को नियमों के विरुद्ध लाभ पहुंचाया गया है, उनसे संबंधित राशि वापस वसूली जाए।
संगठन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रदेश के हजारों छात्रों की शिक्षा का प्रमुख केंद्र है और यहां शिक्षा को सुलभ और सस्ती बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
एसएफआई का कहना है कि फीस वृद्धि का सबसे अधिक असर गरीब, ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों से आने वाले छात्रों पर पड़ेगा। कई छात्र पहले से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और फीस बढ़ने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आर्थिक कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन अपनी गलतियों और खर्चों का भार छात्रों पर डालने का प्रयास कर रहा है।
एसएफआई नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि फीस वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आने वाले समय में बड़ा छात्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि एसएफआई विश्वविद्यालय के छात्रों को लामबंद कर प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन करेगी और छात्र हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि फीस वृद्धि को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए और छात्रों के हित में पारदर्शी वित्तीय नीति अपनाई जाए।
एसएफआई ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने के बजाय छात्रों के अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए और विश्वविद्यालयों को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करना चाहिए।