आंगनवाड़ी कर्मियों ने चुनाव ड्यूटी आदेश का किया विरोध

rakesh nandan

19/05/2026

Centre of Indian Trade Unions (सीटू) से संबंधित आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन हिमाचल प्रदेश ने निर्वाचन आयोग द्वारा जारी उस आदेश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें चुनाव ड्यूटी के दौरान पोलिंग पार्टियों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी आंगनवाड़ी कर्मियों को देने की बात कही गई है।

यूनियन की राज्य कमेटी ने इस आदेश को महिला कर्मियों पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि आंगनवाड़ी कर्मियों पर पहले से ही काम का अत्यधिक दबाव है और ऐसे में चुनाव ड्यूटी के दौरान खाना बनाने की अतिरिक्त जिम्मेदारी देना अनुचित है।

यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि चुनाव के दिन सामान्य रूप से अवकाश घोषित रहता है, लेकिन पोलिंग पार्टियां मतदान से एक दिन पहले ही संबंधित मतदान केंद्रों पर पहुंच जाती हैं। ऐसे में आंगनवाड़ी कर्मियों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि वे अपने नियमित कार्य करेंगी या फिर चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भोजन तैयार करेंगी।

यूनियन ने यह भी कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में लगभग सभी कर्मी महिलाएं हैं, जबकि चुनाव ड्यूटी में तैनात पोलिंग पार्टियों में अधिकतर पुरुष कर्मचारी शामिल होते हैं। ऐसे में देर रात तक भोजन बनाने और परोसने का कार्य महिला कर्मियों की सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से भी उचित नहीं है।

यूनियन के अनुसार भोजन तैयार करने और अन्य व्यवस्थाओं में रात के 10 से 11 बजे तक का समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में महिला कर्मियों को देर रात तक मतदान केंद्रों या स्कूलों में रुकना पड़ेगा, जो सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय है।

राज्य कमेटी ने कहा कि अब तक आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर की ड्यूटी कभी भी रात के समय नहीं लगाई गई थी। पहली बार इस प्रकार की जिम्मेदारी दिए जाने से महिला कर्मियों में असंतोष बढ़ा है।

यूनियन ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन लगातार आंगनवाड़ी कर्मियों से अतिरिक्त कार्य करवाते रहते हैं, जबकि उन्हें पहले से ही अनेक सरकारी योजनाओं और विभागीय गतिविधियों में लगाया जाता है।

उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कर्मियों का मुख्य कार्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण और देखभाल से जुड़ा होता है। इसके अलावा रिकॉर्ड तैयार करना, सर्वेक्षण कार्य, पोषण अभियान और अन्य सरकारी कार्यक्रमों की जिम्मेदारियां भी उनके पास होती हैं।

यूनियन ने कहा कि इतने कार्यभार के बावजूद चुनाव ड्यूटी में भोजन व्यवस्था का अतिरिक्त काम देना पूरी तरह अनुचित और महिला कर्मियों के साथ अन्याय है।

राज्य कमेटी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी कर्मचारी से जबरन कार्य नहीं करवाया जाना चाहिए। यदि प्रशासन को भोजन व्यवस्था करनी है तो इसके लिए अलग से उचित प्रबंध किए जाएं।

यूनियन ने सरकार और निर्वाचन आयोग से मांग की है कि इस आदेश को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए और आंगनवाड़ी कर्मियों को इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए।

उन्होंने कहा कि महिला कर्मियों की सुरक्षा, कार्य परिस्थितियों और सम्मान को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।

यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो राज्यभर में आंगनवाड़ी कर्मियों के बीच विरोध तेज किया जा सकता है।

यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि आंगनवाड़ी कर्मी पहले ही सीमित मानदेय और भारी कार्यभार के बीच काम कर रही हैं। ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारियां थोपना उचित नहीं है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंगनवाड़ी कर्मियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें अनावश्यक दबाव से बचाया जाए।