गोविंद सागर में अवैध मत्स्य शिकार पर बड़ी कार्रवाई

rakesh nandan

19/05/2026

मत्स्य संपदा के संरक्षण और जलाशयों में अवैध मत्स्य गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से Fisheries Department Himachal Pradesh द्वारा गोविंद सागर और कोलडैम जलाशयों में विशेष निरीक्षण एवं गश्त अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 16 और 17 मई को विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण कर अवैध मत्स्य शिकार के मामलों में सख्त कार्रवाई की।

मत्स्य अधिकारी Suram Singh और उनकी टीम ने 17 मई को गोविंद सागर जलाशय के बडडू, लुरहाड़ और दाड़ीभाड़ी क्षेत्रों में गश्त अभियान चलाया। निरीक्षण के दौरान लगभग 21 किलोग्राम अंडर साइज जाल जब्त किए गए।

इसके अलावा 16 मई को गोविंद सागर जलाशय के बागछाल क्षेत्र में अवैध मत्स्य शिकार का एक मामला पकड़ा गया, जिसमें संबंधित व्यक्ति से 500 रुपये जुर्माना और मुआवजा राशि के रूप में वसूले गए।

मत्स्य विभाग ने कोलडैम जलाशय क्षेत्र में भी रात्रि गश्त के दौरान विशेष कार्रवाई की। मत्स्य क्षेत्रीय सहायक Harish Kumar ने सुन्नी क्षेत्र के समीप अवैध मछली परिवहन के तीन मामले पकड़े।

इन मामलों में विभाग द्वारा कुल 10 हजार रुपये मुआवजा राशि के रूप में वसूले गए। साथ ही लगभग 20 किलोग्राम अवैध मछली खराब होने के कारण नियमानुसार नष्ट की गई।

इसी प्रकार 16 मई को मत्स्य अधिकारी Vivek Kamal और उनकी टीम ने गोविंद सागर जलाशय के बीट नंबर-1 में निरीक्षण के दौरान खोली और बालू क्षेत्र से लगभग 30 किलोग्राम अंडर साइज गिल नेट जब्त किए।

वहीं मत्स्य क्षेत्रीय सहायक Abhineet ने सीर खड्ड क्षेत्र में गश्त के दौरान अवैध मत्स्य शिकार के दो मामले पकड़े। इन मामलों में 1500 रुपये मुआवजा राशि वसूली गई तथा लगभग 7 किलोग्राम मछली की नीलामी कर 600 रुपये राजस्व प्राप्त किया गया।

सहायक निदेशक मत्स्य Pankaj Thakur ने बताया कि गोविंद सागर जलाशय में 46 और कोलडैम जलाशय में 4 मत्स्य सहकारी सभाओं के माध्यम से 2500 से अधिक मछुआरे मत्स्य आखेट का कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा प्रतिवर्ष जलाशयों में लाखों की संख्या में मत्स्य बीज डाले जाते हैं, ताकि मछुआरों को पर्याप्त मात्रा में मछली उपलब्ध हो सके और मत्स्य उत्पादन में निरंतर वृद्धि बनी रहे।

पंकज ठाकुर ने बताया कि विभाग के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में गोविंद सागर जलाशय के मत्स्य उत्पादन में वर्ष 2023-24 की तुलना में 156.33 मीट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई।

इसके अलावा वर्ष 2025-26 में वर्ष 2024-25 की तुलना में 56.45 मीट्रिक टन अतिरिक्त उत्पादन दर्ज किया गया है। विभाग का मानना है कि अवैध मत्स्य गतिविधियों पर नियंत्रण और नियमित निगरानी से मत्स्य उत्पादन में सुधार हो रहा है।

उन्होंने बताया कि हर वर्ष 16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्य प्रजनन अवधि के दौरान जलाशयों में मत्स्य आखेट पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। इस दौरान सक्रिय मछुआरों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।

मत्स्य विभाग के अनुसार प्रजनन अवधि में मछलियों को प्राकृतिक रूप से विकसित होने का अवसर मिलता है, जिससे जलाशयों की मत्स्य संपदा सुरक्षित रहती है।

निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य हिमाचल प्रदेश Vivek Chandel ने कहा कि विभाग द्वारा अवैध मत्स्य गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए नियमित निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे।

उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने मछुआरों और स्थानीय लोगों से मत्स्य नियमों का पालन करने और जलाशयों की मत्स्य संपदा के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।