शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर SFI का हस्ताक्षर अभियान

rakesh nandan

31/05/2026

Students’ Federation of India हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अपनी चिंताओं के बीच 1 जून से राज्यव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के अनुसार यह अभियान 1 जून से 3 जून 2026 तक चलाया जाएगा और इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग को मजबूत करना है।

एसएफआई हिमाचल प्रदेश द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और विभिन्न परीक्षा संचालन संस्थाओं से जुड़े विवादों, परीक्षा प्रबंधन में कथित खामियों तथा छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर यह अभियान शुरू किया जा रहा है। संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की है।

1 से 3 जून तक चलेगा अभियान

एसएफआई ने बताया कि यह तीन दिवसीय अभियान पूरे प्रदेश में कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। संगठन का दावा है कि लाखों छात्रों का भविष्य प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर करता है और परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता छात्रों के विश्वास को प्रभावित करती है।

संगठन के अनुसार इस हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से छात्रों, अभिभावकों और जागरूक नागरिकों की राय एकत्रित की जाएगी और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।

NTA की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

एसएफआई ने अपने बयान में कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी देश की कई प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे CUET, UGC-NET, JEE और NEET के आयोजन की जिम्मेदारी संभालती है। संगठन का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में इन परीक्षाओं को लेकर कई विवाद सामने आए हैं, जिनसे छात्रों के बीच असंतोष बढ़ा है।

संगठन ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए विवादों और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

छात्रों का भरोसा बहाल करने की मांग

एसएफआई का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना आवश्यक है, क्योंकि लाखों विद्यार्थी वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। संगठन का आरोप है कि लगातार सामने आ रहे विवादों के कारण छात्रों और अभिभावकों का भरोसा प्रभावित हुआ है।

एसएफआई नेताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं के भविष्य और करियर से सीधे जुड़ा विषय है। इसलिए किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही या अनियमितता को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

छात्रों और अभिभावकों से जुड़ने की तैयारी

राज्य कमेटी ने कहा कि अभियान के दौरान छात्रों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा और उनसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अनुभव एवं सुझाव भी लिए जाएंगे। इसके अलावा अभिभावकों और नागरिक समाज के विभिन्न वर्गों को भी इस अभियान में शामिल करने की योजना बनाई गई है।

संगठन का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केवल छात्रों ही नहीं बल्कि समाज के सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से हस्ताक्षर अभियान को व्यापक जनसमर्थन दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग

एसएफआई ने कहा कि वह शिक्षा के अधिकार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली के पक्ष में लगातार आवाज उठाती रही है। संगठन का कहना है कि परीक्षा संचालन संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए और भविष्य में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों, इसके लिए प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

संगठन ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

नागरिकों से सहयोग की अपील

एसएफआई हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश के छात्रों, अभिभावकों और जागरूक नागरिकों से इस हस्ताक्षर अभियान में भाग लेने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह अभियान शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में एक प्रयास है।

संगठन ने उम्मीद जताई कि बड़ी संख्या में लोग इस अभियान का हिस्सा बनेंगे और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज दर्ज कराएंगे।