विश्व पर्यावरण दिवस पर SFI ने जलवायु परिवर्तन पर किया सेमिनार

rakesh nandan

05/06/2026

विश्व पर्यावरण दिवस पर जलवायु परिवर्तन विषय पर सेमिनार आयोजित, छात्रों ने लिया भाग

शिमला। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एसएफआई (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) शिमला शहरी कमेटी द्वारा प्रदेश स्तरीय गैर-सरकारी संगठन हिमालयन सेंटर फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट (HCHD) के सहयोग से “जलवायु परिवर्तन” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिमला के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अशोक ठाकुर उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए इसके विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरणीय संकट नहीं है, बल्कि यह मौजूदा विकास मॉडल और नीतिगत निर्णयों से भी जुड़ा हुआ विषय है।

अशोक ठाकुर ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग और पर्यावरणीय संतुलन में लगातार हो रहे हस्तक्षेप के कारण जलवायु परिवर्तन की समस्या गंभीर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं, औद्योगिक गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते दोहन का पर्यावरण पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बढ़ रही प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़ और सूखे जैसी घटनाएं पर्यावरणीय असंतुलन की ओर संकेत करती हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्यावरण संरक्षण को विकास नीतियों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है।

मुख्य वक्ता ने कहा कि पर्यावरणीय मुद्दों पर केवल चिंता व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवहारिक और दीर्घकालिक समाधान अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जंगलों, जल स्रोतों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किए बिना जलवायु परिवर्तन की चुनौती का प्रभावी समाधान संभव नहीं है।

सेमिनार में वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के बीच संतुलन स्थापित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाएं ऐसी होनी चाहिए जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों के हितों को भी ध्यान में रखें।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों को जलवायु परिवर्तन के कारणों, प्रभावों और संभावित समाधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, ग्लेशियरों का पिघलना और जैव विविधता पर पड़ने वाला प्रभाव जलवायु परिवर्तन के प्रमुख परिणाम हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

सेमिनार में पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित करने तथा पर्यावरण-अनुकूल विकास नीतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करना सभी की साझा जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी करते हुए पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे और अपने विचार साझा किए। छात्रों को दैनिक जीवन में पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनाए जा सकने वाले उपायों के बारे में भी जागरूक किया गया। उन्हें जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।

एसएफआई के प्रतिनिधियों ने युवाओं और विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण और जलवायु न्याय के मुद्दों पर जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे।