हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में पूर्व गर्भाधान एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, रिकांग पिओ में संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता समिति के सदस्य सचिव एवं मेडिकल हेल्थ ऑफिसर डॉ. सुधीर ने की।
⚖️ अधिनियम के पालन पर विशेष जोर
बैठक में अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन, भ्रूण लिंग चयन पर पूर्ण प्रतिबंध तथा पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित निगरानी एवं निरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही जन-जागरूकता गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।
🏥 जिले में 9 अल्ट्रासाउंड केंद्र
डॉ. सुधीर ने जानकारी दी कि जिले में वर्तमान में कुल 9 अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं, जिनमें 6 सरकारी और 3 निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि निजी क्षेत्र के केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाएगा, ताकि अधिनियम के किसी भी प्रकार के उल्लंघन को रोका जा सके।
🚫 उल्लंघन पर सख्त सजा
अधिनियम के उल्लंघन पर कड़े दंड का प्रावधान है—
- पहली बार अपराध पर 3 वर्ष तक का कारावास
- पुनः अपराध पर 5 वर्ष तक का कारावास
- संबंधित चिकित्सक का पंजीकरण निलंबित या रद्द किया जा सकता है
📢 आमजन से अपील
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे भ्रूण लिंग चयन जैसी अवैध गतिविधियों के प्रति जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत प्रशासन को दें, ताकि इस सामाजिक कुरीति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। बैठक में समिति के आधिकारिक और गैर-आधिकारिक सदस्यों के साथ निजी सदस्य हीरा देवी, राधा नेगी एवं अन्य चिकित्सक भी उपस्थित रहे।