परमार पुण्यतिथि पर कार्यक्रम न होने पर भाजपा नाराज

rakesh nandan

02/05/2026

हिमाचल प्रदेश के निर्माता एवं प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की पुण्यतिथि पर राज्य सरकार द्वारा कोई औपचारिक कार्यक्रम आयोजित न किए जाने को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है।

भाजपा नेता एवं मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस महान व्यक्तित्व ने हिमाचल प्रदेश को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई, आज उसी को राज्य की कांग्रेस सरकार ने भुला दिया है।

उन्होंने कहा कि डॉ. परमार का निधन 2 मई 1981 को हुआ था। उनके सम्मान में वर्ष 1984 में रिज मैदान, शिमला में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई थी। इसके बाद से हर वर्ष उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर सरकारी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। इन कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री, मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते थे।

हालांकि, इस बार ऐसा कोई भी औपचारिक आयोजन न किए जाने पर भाजपा ने इसे गंभीर मुद्दा बताया है। कर्ण नंदा के अनुसार, यह कदम न केवल डॉ. परमार के योगदान का अपमान है, बल्कि प्रदेश के इतिहास और उसकी विरासत की अनदेखी भी है।

उन्होंने आगे कहा कि डॉ. परमार ने हिमाचल प्रदेश के गठन और विकास के लिए लंबा संघर्ष किया था। स्वतंत्रता के बाद जब पहाड़ी क्षेत्रों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता थी, तब उनके नेतृत्व में हिमाचल को एक अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में स्थापित किया गया।

उनके प्रयासों का ही परिणाम था कि हिमाचल प्रदेश को पहले केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला और बाद में 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि उनके दूरदर्शी नेतृत्व, राजनीतिक कौशल और प्रदेश के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार का यह रवैया दर्शाता है कि वह महापुरुषों के योगदान को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब राज्य सरकार पर इस तरह के आरोप लगे हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इससे पहले भी अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़े कार्यक्रमों की अनदेखी की गई थी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों में भी राज्य सरकार की सक्रियता अपेक्षित स्तर पर नहीं रही।

कर्ण नंदा ने कहा कि कांग्रेस सरकार का यह रवैया इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रहित के मुद्दों के प्रति उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि महापुरुषों के सम्मान और उनके योगदान को याद रखना किसी भी समाज के लिए आवश्यक होता है। इससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और समाज में सकारात्मक मूल्यों का विकास होता है।

अंत में, भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी ने डॉ. यशवंत सिंह परमार की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश के विकास के लिए उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक रूप से और भी तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यह केवल एक कार्यक्रम के आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत और राजनीतिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ है।